
अगर आप भी पीते है गन्ने का जूस, तो जरूर पढ़ें ये खबर
सागर. गन्ने का रस दस रुपए में मिठास के साथ बिक रहा है। इसकी हकीकत जानी तो पता लगा मिठास में मिलावट का खेल हो रहा है। केमिकल और सेक्रीन मिला इनका स्वाद और रंग बदलकर लोगों के सामने परोसा जा रहा है। ये सामान भी धड़ल्ले से बिक रहा है। सेहत से खिलवाड़ पर जिम्मेदार बेखबर हैं।
शहर के किराना बाजार की पड़ताल करने के बाद हमें पता चलता है कि इसके लिए भी तरह-तरह के रंग और एसेंस यहां मौजूद है। फिर चाहे बात आम का जूस बनाने की हो या गन्ने की, सब यहां मिल जाते है। दुकानदार ने पिकाक केमिकल 45 रुपए की शीशी- 50 ग्राम की बताई। मिलाने के तरीके पर उसने कहा कि बनाने वाले को बता देना। 200 से 300 लोगों के लिए इससे जूस बन जाएगा। जरूरत से ज्यादा मिठास मिलने पर शहर की कुछ दुकानों का स्टिंग करने पर हकीकत सामने आई।घंटाघर चौक पर गन्ने की दुकान पर जांचा तो पता लगा चोरी छिपे रस में सेक्रीन मिलाया जा रहा है।
शहर में 300 दुकानें, जांच एक की भी नहीं
गन्ने का रस, आम का जूस सहित इस तरह के खाद्य पदार्थों की शहर में करीब ३०० छोटी-बड़ी दुकानें खुल गई। इनमें किस गुणवत्ता का सामान बिक रहा इसकी जांच के लिए प्रशासन बेपरवाह है। अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि अधिकांश दुकानों में सेहत से खिलवाड़ कर स्वाद के लिए मिलावट हो रही है।
गन्ने की रस की दुकान
गन्ने की चरखी पर चरखी चलाने वाला गन्ने में नींबू के साथ एक नमक डालने जैसी डिब्बी में सेकरीन पाउडर नीचे रखा हुआ था। दो बार गन्ने को चरखी में घुमाने के बाद नींबू लगाने के बहाने गन्ने के बीच में सेक्रीन का पाउडर छिड़कने के बाद उसका रस मिला रहा था। जैसे ही हमने उसके पास गए। उसने डिब्बी निकालकर बाहर रख दी।
ऐसे करें पहचान
डॉ एमए खान के मुताबिक बर्फ मिला गन्ना अधिक मीठा लगे और मिठास गले में चिपके तो वह आप से सेकरीन मिला जूस पिया है। पांच रुपए व दस रुपए में मेंगो, पाइनेपल, मौसमी जूस आप घर में भी नहीं बना सकते तो बाजार में उसे पीना स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
ऐसे हो रहा तैयार
- 100 ग्राम सेकरीन से 6 किलो शकर सी मिठास, कीमत मात्र 35 से 40 रुपए
- आम, पाइनेपल, नीबू आदि रस 500 लीटर जूस
- एसेंस- 10 से 20 मिली लीटर- 20 से 30 रुपए, साइट्रिक एसिड- 10 रुपए में। अरारोट करीब एक से डेढ़ किलो- 30 रुपए का। औसत सौ से डेढ़ सौ रुपए में 50 लीटर जूस तैयार।
मिलावटी पेय पदार्थो से तत्काल नुकसान के रूप में सेकरीन से गला खराब होता है, एलर्जी और व्यक्ति को संक्रमण रोग हो सकता है। इनके ज्यादा उपयोग से हार्ड अटैक भी हो सकता है। इसी तरह खाने में उपयोग हो रहे सस्ते खाने के रंग जैसे लाल रंग के लिए रोडामिन बी, पीले के लिए मेटानिल यलो, नारंगी के लिए ऑरेंज टू, हरे के लिए मैलकाइन ग्रीन का इस्तेमाल किया जाता है। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
राकेश अहिरवार, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
ये बीमारियां होती हैं फफूंद लगे गन्ने का रस पीने से
गन्ने पर जो फफूंद होती है उससे हेपेटाइटिस ए, डायरिया और पेट की बीमारियां होती हैं। इसी प्रकार गन्ने की मिट्टी से भी पेट संबंधी बीमारियां होती हैं। गन्ने में अगर लालिमा है तो इसके रस मत पीजिए। इस फफूंद को गन्ने की सड़ांध या रेड रॉट डिजीज कहा जाता है। यह एक तरह का फंगस है, जो गन्ने के रस को लाल कर देता है। इससे जूस की मिठास भी कम हो जाती है। ऐसा गन्ना सस्ता मिलता है और सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। अगर गन्ने का रस बनाते समय साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो ज्वाइंडिस, हेपेटाइटिस, टायफायड, डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
Published on:
09 Jun 2018 12:59 pm

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