
Gyanoda school case Girl chefs made girls while bathing Video viral
सागर. समय पर खाना न मिलने के कारण स्कूल में धरना देने के बाद तालाबंदी कर चुकी छात्राओं के केस में एक सनसनीखेज घटनाक्रम सामने आया है। ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय की छात्राओं का आरोप है कि एक महिला रसोइया ने कुछ महीने पहले उन पर दबाव बनाने के लिए कुछ लड़कियों का नहाते वक्त वीडियो बना लिया था।
मामले में कमिश्नर मनोहर दुबे का कहना है कि जांच टीम ने रिपोर्ट सौंप दी है। इस पर तीन दिन में निर्णय लेकर कार्रवाई करेंगे। वहीं वीडियो बनाए जाने के सवाल पर कहा कि अभी मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। सूत्रों के अनुसार छात्राओं ने इस बात की शिकायत सोमवार को स्कूल पहुंचे जांच दल को भी बताई थी। उधर, छह दिन से चल रहे घटनाक्रम के बाद मंगलवार को रसोइयों को छात्रावास में प्रवेश नहीं दिया गया। स्कूल प्राचार्य शिवकुमार चौरसिया ने कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किया है।
चार महिलाएं तैनात साथ ही छात्राओं को समय पर भोजन उपलब्ध कराने के लिए वार्डन शुभे सिंह ने चार निजी महिलाओं को खाना बनाने तैनात किया है। मंगलवार को सुबह करीब सवा दस बजे सभी छात्राओं को खाना मिल गया था और वे 10.45 बजे स्कूल भी पहुंच गईं थीं।
शासकीय ज्ञानोदय आवासीय स्कूल में रविवार को फिर बवाल हो गया। कर्मचारियों की मनमर्जी से परेशान छात्राओं ने मुख्य गेट पर तालाबंदी करते हुए रसोइयों को बाहर कर दिया। रोज-रोज की मनमानी से तंग आ चुकी छात्राओं ने स्वयं ही मोर्चा संभाला और पांच छात्राओं ने एक रसोइए के साथ मिलकर 109 लड़कियों का खाना बना दिया। इसमें वार्डन शुभेसिंह ने भी उनका साथ दिया। इसके बाद बाकायदा छात्राओं ने लाइन लगाकर खाना लिया। परोसने वाली भी छात्राएं ही थीं। इस पूरे घटनाक्रम
की जानकारी अधिकारियों को होने के बावजूद भी कोई मौके पर नहीं पहुंचा।
रविवार को अवकाश के दिन छात्राओं ने सुबह 7 बजे ही गेट पर ताला लगा दिया था। उनका कहना था कि हम 6 साल से परेशान हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं है। न खाना समय से मिलता है न ही नाश्ता। इसी वजह से उन्हें रोजाना स्कूल पहुंचने में भी देर हो जाती है। परेशानी को लेकर बीते गुरुवार को भी छात्राएं स्कूल में धरने पर बैठ गई थीं। इसके बाद मौके पर पहुंचे आदिम जाति-कल्याण विभाग के अधिकारी जयंत जैन, महिला थाना टीआई रीता सिंह और प्राचार्य डॉ.शिव कुमार चौरसिया ने व्यवस्थाएं सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन तीन दिन बाद भी मामले में कुछ नहीं हुआ है।
अब छात्राओं का कहना है कि जब तक कर्मचारी नहीं बदले जाते हैं, वे उनके हाथ का बना खाना नहीं खाएंगी। यदि जरूरत पड़ी तो दोबारा स्वयं ही किचन की जिम्मेदारी संभालेंगी। रविवार को मेस प्रभारी समेत पांच छात्राओं ने रसोइया विनोद और गार्ड लीला कबीरपंथी की मदद से खाना बनाया। वार्डन ने भी उनका हाथ बंटाया। इस दौरान छात्राओं ने दिनभर महिला कर्मियों को भवन के अंदर नहीं आने दिया।
2010 से दे रहे नोटिस
मौके पर मौजूद वार्डन शुभे सिंह ने बताया यहां सालों से परेशानी चल रही है। ये कर्मचारी छात्राओं को परेशान करती हैं। इससे पहले भी 17 जुलाई 2010, 10 फरवरी 2012 , 2 अगस्त 2013 और फरवरी 2017 को नोटिस दिया गया था। जिसका जवाब भी इनके द्वारा नहीं दिया गया। सिंह ने बताया भंडार गृह में पर्याप्त खाना उपलब्ध होने के बावजूद छात्राओं को खाना बनाकर नहीं दिया जाता है।
ये बोली छात्राएं
& मैं 6वीं से यहां पढ़ाई कर रही हूं और 6 साल से हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है। शनिवार को सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक हमें कर्मचारियों ने खाने के लिए कुछ नहीं दिया था।
आंचल राजपूत
& हमारे लिए कभी समय पर खाना नहीं मिलता। खाने में कभी-कभी इल्लियां निकलती हैं, कभी सब्जियां साफ करके नहीं बनती। बगैर धूले सब्जी बना दी जाती है। अब ऐसे कर्मचारियों के हाथ का खाना हमें नहीं खाना है।
श्रेया सूर्यवंशी
& हम खाना मंगाते हैं तो हमारे ऊपर चिल्लाती हैं। रोज हम स्कू ल समय पर नहीं जा पाते हैं। यहां कोई समय फिक्स नहीं है।
प्रियंका अहिरवार
Published on:
25 Jul 2018 04:16 pm

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