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एमपी के इस शहर में शिक्षा का बंटाढार, विद्यार्थियों के पड़े लाले, कक्षाओं में डल गए ताले

6 साल में कम हुए 17 हजार विद्यार्थी, हर साल 3300 घटे

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सागर

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Reshu Jain

Dec 26, 2017

Here 17 thousand students decreased in 6 years 3300 decreases every ye

सागर. सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या तेजी से घट रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2011 से 2016 तक छह सालों में 17 हजार बच्चे कम हो गए हैं। औसतन हर साल 3300 बच्चे सरकारी स्कूलों में प्रवेश नहीं ले रहे हैं। शहरी स्कूलों में तो हालात बेहद खराब हैं। स्थिति यह है कि प्रायमरी स्कूलों में तो छात्र संख्या महज 20 तक जा पहुंची है।

हाजिरी भी हो रही कम
सरकारी स्कूलों में रोजाना हाजिरी भी कम हो रही है। दाखिले के बावजूद विद्यार्थी कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण सरकारी स्कूलों में निजी के मुकाबले सुविधाओं का अभाव है। शुद्ध पेयजल की कमी, शौचालयों की अभाव और मिड-डे मील की खामियां से बच्चे रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

यह है शिक्षक का नियम
प्राथमिक शाला मे 30 बच्चों की संख्या पर शासन द्वारा १ शिक्षक की नियुक्ति की गई है, लेकिन शहर में अधिकारी कई मनचाहे शिक्षकों को पदस्थ किए हैं, जबकि गांव में इसके उल्ट स्थिति है। वहां शिक्षकों की कमी के चलते विद्यार्थियों की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।

एक से पांचवीं तक एक ही कक्षा
स्कूल में पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एक ही कक्ष में पढ़ाया जा रहा है। ठंड में बच्चों के लिए टाटपट्टी तक का इंतजाम नहीं है। 39 बच्चों पर दो शिक्षक हैं। प्रभारी एचएम नीता मिश्रा ने बताया यह स्कूल 2014 में ही तिली से संजयनगर में शिफ्ट हुआ है। तीन सालों में यह स्कूल अपने दर्द की दास्तां बताने लगा है।

एक तिहाई रह गए बच्चे
शिवाजी नगर के स्कूल में केवल 22 विद्यार्थी दर्ज हैं। यहां ३ सालों में बच्चों की संख्या घटकर आधे से कम रह गई है। एचएम हीरेन्द्र दंतवास ने बताया कि 2015 में इस स्कूल बच्चों की संख्या 66 थी, जो 2017 में 22 हो गई है। कक्षा पांचवी में पांच विद्यार्थी हैं, वहीं कक्षा पहली से चौथी तक एक साथ क्लास संचालित की जा रही है।

कक्षा में पांच बच्चे, दर्ज 26
पुलिस लाइन के इस स्कूल में शिक्षकों को पूरा आराम है, क्योंकि विद्यार्थियों संख्या घटकर 26 रह गई है। पत्रिका की टीम जब यहां पहुंची तो स्कूल की प्राचार्य नीता गौतम धूप का आनंद ले रहीं थी। स्कूल में पांचवीं, चौथी और पहली कक्षा में एक साथ पढ़ाई कराई जा रही थी, जबकि दूसरी और तीसरी कक्षा को भी एक साथ लगाया गया था।

एक ही कमरे में हो रही पढ़ाई
सिविल लाइन प्राथमिक शाला में केवल २२ विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं और रोजाना की हाजिरी भी कम है। हालात यह है कि स्कूल में एक कमरे में ही शिक्षक पढ़ाई करवाते हैं और बाकी अन्य कक्षों में ताला डाल दिया गया है। प्राचार्य सुशीला पवार ने बताया कि पहले इस स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 80 थी लेकिन अब घटकर 22 हो गई है।