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विधवा से शादी की बड़ी सजा, भोज नहीं कराया तो दंपति का सामाजिक बहिष्कार

Community Boycotts Couple: पीडि़त दंपत्ति का आरोप है कि विवाह के बाद भोज ना कराने पर उन्हें सामान्य जीवन जीने से रोका जा रहा है।

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सागर

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Akash Dewani

Apr 29, 2026

Community Boycotts Couple for not Hosting Feast after marrying a widow MP news

Community Boycotts Couple for not Hosting Feast (फोटो-Patrika.com)

MP news: मध्य प्रदेश के सागर जिले से चौंका देने वाला मामला सामने आया है जहां छोटी बच्ची सहित पूरा परिवार को समाज ने बेतुकी मान्यताओं के कारण अलग-थलग कर दिया। गलती बस इतनी थी कि युवक ने एक विधवा महिला से विवाह करें के बाद गांव को भोज नहीं करवाया। अब पूरा परिवार न्याय की उम्मीद लेकर कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा है।

दरअसल, चितौरा गांव में एक युवक द्वारा विधवा महिला से विवाह करने के बाद मामला अब सामाजिक तनाव का रूप ले चुका है। पीडि़त दंपत्ति का आरोप है कि विवाह के बाद भोज ना कराने पर उन्हें सामान्य जीवन जीने से रोका जा रहा है और समाज के कुछ लोगों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इसी परेशानी से तंग आकर दंपत्ति कलेक्ट्रेट पहुंचा और प्रशासन से लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई।

कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत हुई शादी

ग्राम चितौरा निवासी राजेंद्र पटेल ने करीब 8 माह पहले मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता योजना के तहत एक विधवा महिला से विवाह किया था। महिला के पहले पति का निधन हो चुका था और उसकी एक छोटी बच्ची भी है। राजेंद्र ने विवाह के बाद न केवल महिला को अपनाया बल्कि उसकी बच्ची को भी अपने परिवार का हिस्सा बनाकर जीवन की नई शुरुआत की।

मुखिया ने रख दी अजीब शर्त, पूरा नहीं किया तो कर दिया बहिष्कार

दंपत्ति का आरोप है कि विवाह के बाद गांव के कुछ लोगों और समाज के कथित मुखिया खुमान पटेल ने इस विवाह को स्वीकार नहीं किया। समाज में मान्यता देने के नाम पर उनसे "कच्चा" और "पक्का" भोजन कराने की परंपरागत शर्त रखी गई। जब दंपत्ति ने इस तरह की प्रथा को मानने से इनकार किया, तो उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का निर्णय सुना दिया गया। इसके बाद उन्हें सामाजिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया।

बच्ची को भी नहीं छोड़ा, अन्य गांवों में कर रहे बदनाम

पीड़ित दंपति ने आरोप लगाया कि मुखिया द्वारा जारी तुगलकी फरमान के बाद उनकी बच्ची का बहिष्कार कर दिया गया है। दूसरे बच्चों को उनकी बच्ची के साथ खेलने नहीं दिया जा रहा है। यहीं नहीं, अन्य गांवों में भी परिवार का हुक्का-पानी बंद कराने की साजिश भी चल रही है। आसपास के गांवों में परिवार की बदनामी की जा रही है। पति राजेंद्र पटेल ने कहा कि हमने कुछ गलत नहीं किया, सिर्फ एक बेसहारा को सहारा दिया है। क्या किसी की जिंदगी संवारना अपराध है?

कलेक्टर से मांगा न्याय

पीड़ित दंपति अपनी छोटी बच्ची न्याय की आस लेकर अब कलेक्ट्रेट पहुंचा है। पीड़ित पति ने शिकायत देकर मांग की है कि सामाजिक बहिष्कार करने वाले मुखिया पर सख्त कार्रवाई की जाए। (MP news)