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हिन्नौद में सड़क के लिए ग्रामीणों का प्रदर्शन, अक्रिमण हटाने की मांग

तहसील पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, प्रशासन पर अनदेखी के आरोप, सड़क बंद होने से पंद्रह सौ लोग हैं परेशान, कई पर मांग करने के बाद भी नहीं दिया जा रहा ध्यान

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Villagers protest for road in Hinnod, demand removal of encroachment

तहसीलदार से शिकायत करते हुए ग्रामीण। फोटो-पत्रिका

बीना. ग्राम पंचायत हिन्नौद के लोग मंगलवार को तहसील कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाकर सड़क निर्माण कराने की मांग को लेकर सरपंच मानक सिंह के नेतृत्व में तहसीलदार डॉ. अंबर पंथी को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि पाल एवं आदिवासी मोहल्ले तक जाने वाला मार्ग वर्षों से अतिक्रमण की जद में है, जिससे करीब 1500 से अधिक लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है, इसके बावजूद जमीन खाली न होने से कार्य शुरू नहीं हो पा रहा। बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। सरपंच ने कहा कि वह बीते तीन वर्षों से तहसील और कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

व्यक्तिगत शिकायतें भी रखीं सामने

तहसील पहुंचे ग्रामीणों ने सामूहिक मांगों के साथ अपनी व्यक्तिगत समस्याएं भी अधिकारियों के सामने रखीं। गोपी अहिरवार निवासी करोंदा ने आरोप लगाया कि शासन से मिले पट्टे की जमीन पर उनके ही भाई ने कब्जा कर रखा है। खसरे में नाम दर्ज होने के बावजूद उन्हें जमीन का अधिकार नहीं मिल पा रहा। वह तीन साल से समाधान के लिए भटक रहे हैं। बरमाइन गांव के वीरेंद्र पटेल ने विवाह प्रमाण पत्र जारी न होने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि दो माह से कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं और अब तक करीब 800 रुपए खर्च कर चुके हैं, फिर भी दस्तावेज नहीं मिल पाया है। इसी तरह पारासरी गांव के दिनेश राजोरिया ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन पर तीन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है, लेकिन शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे पूर्व जनपद अध्यक्ष इंदर सिंह ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में आमजन की सुनवाई नहीं हो रही और अधिकारी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। उन्होंने समर्थन मूल्य खरीदी केंद्रों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों से प्रति क्ंिवटल 100 रुपए की अवैध वसूली की जा रही है। यदि इस पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।