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 सिल्वर प्लाजा, राजघाट फेज-2 की मांगें पूरी हों, तो बने बात

– कई बार हुए दावे-वादे, ये मांगें पूरी हों तो आम लोगों को भी मिलेगी राहत सागर. प्रदेश सरकार के बजट से सागर जिले के लोगों को हर बार उम्मीद रहती है। कुछ ऐसी मांगें हैं, जो लंबे समय से लंबित हैं या उनकी अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण आम लोग परेशान हो […]

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- कई बार हुए दावे-वादे, ये मांगें पूरी हों तो आम लोगों को भी मिलेगी राहत

सागर. प्रदेश सरकार के बजट से सागर जिले के लोगों को हर बार उम्मीद रहती है। कुछ ऐसी मांगें हैं, जो लंबे समय से लंबित हैं या उनकी अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण आम लोग परेशान हो रहे हैं। राजघाट फेज-2, सर्राफा कारोबार के लिए सिल्वर प्लाजा, यातायात जाम की समस्या, केंद्रीय जेल की शिफ्टिंग ऐसे मामले में हैं, जो लोगों से सीधे जुड़े हुए हैं। प्रदेश सरकार बजट में यदि उक्त बिंदुओं का ध्यान रखती है, तो सागर के लिए बड़ी सौगात रहेगी।

प्रमुख मांगें

राजघाट फेज-2- सागर शहर, मकरोनिया और कैंट क्षेत्र की करीब 7 लाख की आबादी को अब भी प्रतिदिन पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। अमृत प्रोजेक्ट के तहत लगभग 400 करोड़ की राशि खर्च होने के बाद भी चौबीस घंटे पानी उपलब्ध कराने का वादा अधूरा है। इसकी मुख्य वजह बांध में पानी की कमी है। राजघाट बांध पेयजल परियोजना के फेज-2 को स्वीकृति मिल जाती है, तो पेयजल की समस्या समाप्त हो जाएगी।

एक्सपर्ट- नगर निगम के पूर्व प्रभारी जलप्रदाय विभाग नरेश यादव ने कहा कि राजघाट फेज-2 के तहत काम बेहद जरूरी है। पूरे साल आम लोग पेयजल के लिए परेशान होते हैं। गर्मी में यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।

सिल्वर प्लाजा- सागर में मप्र की दूसरी सबसे बड़ी चांदी की मंडी है। इंदौर के बाद यहां पर सबसे ज्यादा कारोबार होता है। इसी के चलते यहां के सर्राफा कारोबारी लंबे समय से सागर में नई जगह पर सिल्वर प्लाजा बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि इस कारोबार को गति मिल सके और युवाओं को रोजगार के नए साधन सृजित हो सकें।

एक्सपर्ट- सर्राफा एसोसिएशन अध्यक्ष विक्रम सोनी ने कहा कि सिल्वर प्लाजा सागर की नई पहचान बन सकता है। इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जिस जगह पर सिल्वर प्लाजा शुरू होगा, उस क्षेत्र का भी तेजी से विकास होगा।

व्यापारिक केंद्र- शहर के पॉश व भीड़भाड़ इलाके में संचालित हो रही केंद्रीय जेल को बाहर शिफ्ट किए जाने की लंबे समय से मांग की जा रही है। इसी वजह से इसको स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। 200 एकड़ जमीन इसके लिए चिन्हित भी हो चुकी है। जेल की शिफ्टिंग के बाद यहां पर बुंदेलखंड का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है।

एक्सपर्ट- इंजी. अनुपम शर्मा का कहना है कि सागर शहर का काफी विस्तार हो गया है, जिसके कारण केंद्रीय जेल शहर के बीच में आ गई है। जेल करीब 64 एकड़ जमीन पर संचालित हो रही है। शहर के बीच में होने के कारण यहां पर बड़ा व्यापारिक केंद्र बनाया जा सकता है, जिससे सागर के विकास को नई दिशा मिलेगी।

संबंधित खबरें

यातायात व्यवस्था- शहर की यातायात व्यवस्था अब जिला, पुलिस और नगर निगम प्रशासन के हाथ से निकल गई है। बिगड़ैल यातायात को पटरी पर लाने के लिए राज्य सरकार से बड़े बजट की आस है, ताकि कटरा बाजार, बड़ा बाजार, भगवानगंज, मकरोनिया चौराहे आदि स्थानों पर फ्लाई ओवर के जरिए ट्रैफिक को व्यवस्थित किया जा सके।

एक्सपर्ट- एड. अशोक तिवारी का कहना है कि सागर शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए अब बड़े व सख्त निर्णय लेने होंगे। कटरा, बड़ा बाजार समेत अन्य स्थानों पर फ्लाई ओवर के निर्माण के बाद ही यातायात जाम की समस्या खत्म होगी।

फैक्ट फाइल

- 28 लाख से ज्यादा है सागर जिले की आबादी

- 7 लाख से ज्यादा है शहर, मकरोनिया और कैंट क्षेत्र की आबादी

- 10 सालों से हो रहे हैं वादे

प्रयास करने ही पड़ेंगे

बजट में कुछ चीजें प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जनता से जुड़ी रहती हैं। उन्हें हर समय वो प्रभावित करती हैं। पेयजल की व्यवस्था करना मूलभूत सुविधाओं में से एक है। यातायात जाम भी ऐसी ही एक समस्या है, जिसके लिए आपको इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना ही होगा। कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने से नए लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार होते हैं। इन्हीं प्रयासों से अर्थव्यवस्था मजबूती से उभरती है। - स्वप्रिल शुक्ला, सीए

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