
Impact of low rainfall Irrigation by rivers ponds
खुरई. कम बारिश के कारण क्षेत्र की नदियों की धार वैसे ही टूट चुकी है। नदियों में शेष रहे जल को अब किसान मोटर-पंप रखकर खेतों की सिंचाई कर नदियों को जलविहीन करने में जुट चुके हैं। यदि प्रशासन समय रहते नहीं चेता तो आगे नगर के वाशिंदों को भी पेयजल जैसे संकट से जूझना पड़ सकता है। क्षेत्र में बीना नदी, नरेन नदी प्रमुख नदियों में गिनी जाती हैं। इन नदियों के आसपास पडऩे वाले गांवों में बेरोकटोक सिंचाई अभियान निरंतर चल रहा है।
बीना नदी के जिन गांवों, क्षेत्रों को छूकर निकलती है उन गांवों के पास सिंचाई हेतु पावर की मोटर पंप दो सौ से पांच सौ मीटर तक की लाइन बिछाकर सिंचाई कर रहे हैं यही हाल नरेन नदी के आसपास पडऩे वाले गांवों के हैं। हालत यह है कि कहीं-कहीं इन नदियों में नदी की धारा टूट चुकी है तो कहीं धार टूटने की कगार पर है। बीना नदी के रूट पर पडऩे वाले क्षेत्र में सर्वाधिक सिंचाई पंप, मोटरें दिन-रात चलती रहती हैं तो नरेन नदी में अब समतल जमीन दिखने लगी है किंतु रहे सहे रुके और भरे हुए जल पर भी मोटर चलाकर पानी को खींचकर अपने खेत सींच रहे हैं।
कम बारिश के चलते जमीनी वाटर लेविल जैसे ही नीचे पहुंच चुका है, नदियों की धार भी अंतिम सांसें ले रही हैं। उस पर अब अवैध रूप से दिन-रात मोटर पंप चलाकर लोग खेतों की सिंचाई करने से नहीं चूक रहे हैं। समय रहते प्रशासन नहीं चेता तो आगे पेयजल की गंभीर समस्या से जूझना पड़ सकता है।
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Published on:
04 Jan 2019 02:11 pm
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