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ज्यादा उत्पादन लेने के चक्कर में किसान अधिक मात्रा में डाल रहे रसायन, भूमि हो रही है कठोर, घट जाएगी उर्वरा क्षमता

जैविक और गोबर खाद का किसान नहीं कर रहे उपयोग, नहीं हो रहे जागरूक

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In order to get more production, farmers are adding chemicals in large quantities.

फाइल फोटो

बीना. फसलों में ज्यादा उत्पादन के चक्कर में किसान भूमि की सेहत बिगाड़ रहे हैं। यह स्थिति खाद, कीटनाशक का जरूरत से ज्यादा उपयोग करने पर हो रहा है। जमीन कठोर होने के साथ-साथ उर्वरा क्षमता कम होने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। किसानों को जैविक खाद उपयोग करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इस तरफ किसानों का रुझान नहीं है।
जानकारों के अनुसार कीटनाशक दवाओं, रासायनिक खाद का ज्यादा उपयोग करने से फसल मित्र जीव-जंतुओं की संख्या साल दर साल घट रही है। साथ ही जमीन कठोर हो रही है और यदि इसी मात्रा में खाद, कीटनाशक डलता रहा तो भविष्य में जमीन बंजर होने की कगार पर पहुंच जाएगी। गेहूं की फसल में यूरिया का उपयोग किसान बहुत ज्यादा मात्रा में कर रहे हैं, लेकिन अधिक यूरिया जमीन और फसलों के लिए हानिकार हो रहा है, जिससे फसलों में इल्ली का प्रकोप बढ़ रहा है। बुजुर्ग किसान भरोसी सिंह ने बताया कि जब खेतों में गोबर का खाद डालते थे, तब नंगे पैर बखरनी कर लेते थे और पैर छिलते भी नहीं थे, क्योंकि मिट्टी भुरभुरी रहती थी। जब से रासायनिक खाद का उपायेग शुरू हुआ है, तब से खेतों में नंगे पैर नहीं चल पाते हैं।

एक एकड़ में दो बोरी यूरिया पर्याप्त
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ज्यादा यूरिया डालने पर पौधों को उपलब्ध नहीं होता है, कुछ जमीन में चला जाता है और कुछ हवा में उड़ जाता है। ज्यादा खाद डालने से सूक्ष्म जीवाणु भी खत्म हो रहे हैं। वहीं, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव किसान करें, जो लाभदायक होगा।

जैविक, गोबर का उपयोग जरूरी
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी धनपाल सिंह तौमर ने बताया कि रासायानिक खाद का उपयोग करने से भूमि कठोर होने से उर्वरा शक्ति साल दर साल कम हो रही है और उत्पादन बढऩे की जगह कम हो रहा है। लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर इसका असर पड़ रहा है। जैविक, गोबर खाद से जमीन का स्वास्थ्य अच्छा होगा, उत्पादन बढ़ेगा, लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।