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गर्मी में जितने पानी की मकरोनिया को चाहिए, राजघाट से उससे दोगुना अवैध रूप से सिंचाई के लिए निकाल रहे रोज

प्रतिबंध के बाद भी राजघाट बांध के पानी से ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई की जाने लगी है। राजघाट बांध हर दिन करीब 5 सेमी रीत रहा है, जो अभी तक 3-4 सेमी खाली हो रहा था, यानी बांध प्रतिदिन 1 सेमी ज्यादा खाली हो रहा है। राजघाट बांध क्षेत्र से लगे 15 से अधिक गांव […]

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सागर

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Rizwan ansari

Apr 13, 2026

प्रतिबंध के बाद भी राजघाट बांध के पानी से ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई की जाने लगी है। राजघाट बांध हर दिन करीब 5 सेमी रीत रहा है, जो अभी तक 3-4 सेमी खाली हो रहा था, यानी बांध प्रतिदिन 1 सेमी ज्यादा खाली हो रहा है। राजघाट बांध क्षेत्र से लगे 15 से अधिक गांव में सिंचाई के दौरान अनुमानित 20 एमएलडी (मिलियन लीटर) पानी अवैध रूप से लिया जा रहा है, जबकि मकरोनिया के लिए अभी मात्र 7-8 एमएलडी पानी दिया जा रहा है।
मकरोनिया सीएमओ पवन शर्मा ने रोज 5 एमएलडी और पानी की मांग नगर निगम से की है। बांध से अवैध सिंचाई रोकी जाए तो शहर व मकरोनिया में जल संकट नहीं गहरा पाएगा। वहीं लगातार खिसक रहे राजघाट के जल स्तर के कारण शहर में भी मई में पानी की किल्लत होने की आशंका जताई जा रही है।

इन गांव में ग्रीष्मकालीन फसलें 2000 एकड़ में की जा रही सिंचाई

पनारी, सेमरा गोपालमन, झुझारपुरा, हिन्नौद, महुआखेड़ा, गढ़ौली, बेरखेड़ी मढिय़ा, सींगना, बिलहरा, मूडऱा, बरौदा, सोठिया, घूघर, हिनौता, अगरा जैसे गांव में करीब 2000 एकड़ से अधिक जमीन की सिंचाई की जा रही है। इन गांव में ग्रीष्मकालीन मूंग व सब्जियों व मौसमी फलों की खेती हो रही है। किसान रोज पानी का उठाव कर रहे हैं। यह फसल क्षेत्र के किसान फरवरी के बाद बोई जाती हैं और गर्मी के मौसम में बांध से सिंचाई के लिए पानी का उठाव करते हैं।

मकरोनिया की मांग…गर्मी आ गई 7 की जगह मिले 11 एमएलडी पानी

सीएमओ पवन कुमार शर्मा ने नगर निगम का पत्र लिखकर मकरोनिया में पेयजल समस्या से अवगत कराया है। पत्र में बताया है कि मकरोनिया के सभी 18 वार्डों में जल सप्लाई के लिए मात्र 7-8 एमएलडी पानी ही मिल रहा है, जबकि जरूरत 13-14 एमएलडी की है, ऐसे में कम से कम 11 एमएलडी पानी मकरोनिया तक पहुंचाया जाए। 16500 नलों में पानी पहुंचाने के लिए ज्यादा पानी चाहिए। अभी नलों में प्रेशर नहीं आ रहा, मात्र 35-35 मिनट ही नल खोले जा रहे हैं, जबकि पानी की खपत बढ़ गई है।

समय पर कदम नहीं उठाए तो गहरा जाएगा जलसंकट

शनिवार को राजघाट बांध का वाटर लेवल 511.44 मीटर था, बीते वर्ष इसी दिन यह 510.72 मीटर था। बीते वर्ष से कुछ सेमी पानी ज्यादा है, लेकिन सिंचाई पर पाबंदी नहीं लगाई और प्रशासन ने कड़े कदम नहीं उठाए तो जल स्तर तेजी से नीचे गिरेगा। गर्मी बढऩे के साथ बांध में वाष्पीकरण भी बढ़ेगा, जिससे 1 सेमी और अधिक जल स्तर नीचे जा सकता है।

दावा एक दिन छोड़ सप्लाई का शहर में 10-12 दिन आ रहे नल

शहर में जल सप्लाई के लिए निगम को रोज 60 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। पूरे महीने में निगम मात्र 10-12 दिन ही पानी दे पा रहा है। शहर के कई इलाकों में 4-5 दिन नल आते हैं। बिजली, मोटर बदलने, लाइन लीकेज होने जैसे समस्याएं आम हैं और कभी भी जल सप्लाई बंद कर दी जाती है।

चिंताजनक…सिंचाई रोकने के नहीं हो रहे कोई प्रयास

बांध का जो क्षेत्र डूब में आता है उसको मुआवजा किसानों को पहले ही दिया जा चुका है लेकिन जैसे ही बांध खाली होता है तो किसान उसमें फसलें उगाने लगते हैं। राजघाट बांध पूरी तरह से पेयजल परियोजना है, जिसमें सिंचाई कार्य शुरुआत से ही प्रतिबंधित है। बांध से लगे गांवों में हर वर्ष यह सूचना जारी की जाती है लेकिन किसान सिंचाई करते हैं। इस वर्ष निगम ने भी सिंचाई रोकने के प्रयास नहीं किए हैं।

फैक्ट फाइल

-78-80 एमएलडी पानी पेयजल के लिए उठाया जा रहा।
-8-10 प्रतिशत पानी लीकेज में कम हो रहा।
-7-8 एमएलडी मकरोनिया के लिए दिया जा रहा।
-3-4 एमएलडी कैंट बोर्ड को जा रहा।

  • 15 गांवों के किसान उठाते हैं बांध से पानी।
  • 2000 एकड़ से ज्यादा में होती है बांध से सिंचाई
  • 1500 से अधिक किसान कर रहे बांध से सिंचाई
  • 540 किसानों की 1700 एकड़ जमीन आई थी डूब में-511.44 मीटर अभी राजघाट का जल स्तर।

मकरोनिया में पानी की समस्या को लेकर टाटा एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक की है। क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त पानी मिले इसके प्रयास किए जा रहे हैं। नगर निगम से भी 5 एमएलडी ज्यादा पानी मांगा है।
पवन कुमार शर्मा, सीएमओ नपा मकरोनिया।

राजघाट बांध के पानी से सिंचाई करना शुरू से ही प्रतिबंधित है। कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे।
राजकुमार खत्री, निगमायुक्त।