प्राचीन सभ्यताओं के लोगों का विश्वास था कि सदाबहार पेड़ की मालाओं, पुष्पहारों, डालियों में जीवन की निरंतरता होती है। उनका मानना था कि इन पौधों को घरों में सजाने से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं। जीसस क्राइस्ट का संदेश सुनने के लिए जब सेंट बोनिफेस इंग्लैंड को छोड़कर जर्मनी चले गए थे तब उन्होंने देखा कि कुछ लोग ईश्वर को खुश करने के लिए एक ओक वृक्ष के नीचे एक छोटे बालक की बलि दे रहे थे। यह देखकर सेंट बोनिफेस बहुत दुखी हुए। उन्होंने वह ओक वृक्ष कटवा डाला और उसकी जगह चीड़ का नया पौधा लगवाया, जिसे सेंट बोनिफेस ने प्रभु जीसस क्राइस्ट के जन्म का प्रतीक माना। उनके अनुयायिओं ने उस पौधे को मोमबत्तियों और रंगीन धागों से से सजाया। तभी से क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा चली आ रही है।