
- इधर लकड़ी के टाल, बड़े गोदाम को शिफ्ट करने योजना ही नहीं बनी
सागर. दूरदर्शिता की कमी कहें या कार्य में लापरवाही, जिससे शहर के एक के बाद एक मामले उलझते ही जा रहे हैं। डेयरी विस्थापन, ट्रासंपोर्ट नगर शिफ्टिंग, फिश मार्केट, फ्रूट मार्केट पर पूर्व में करोड़ों रुपए खर्च किए गए लेकिन इनका व्यवस्थित विस्थापन नहीं हो पाया। यही हाल अब बस स्टैंड शिफ्टिंग को लेकर भी हुआ है। अफसरों में इच्छाशक्ति की कमी और कमजोर प्लानिंग ने शहर को वापस 30 साल पीछे ढकेल दिया है।
डेयरी विस्थापन- सवा साल से डेयरी विस्थापन पर प्रयास चल रहे हैं, लेकिन अब तक सारी कोशिशें असफल साबित हुईं हैं। प्रशासन ने इस मामले में सख्ती तो दिखाई लेकिन डेयरी विस्थापन स्थल पर व्यवस्थाएं सही न होने के कारण पशुपालक वहां जाने की तुलना में दूसरी जगह चले गए और अब दोबारा शहर में ही डेयरियां संचालित हो रहीं हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर- अमावनी में ट्रांसपोर्ट नगर बनाया गया है, जहां पर शहर के सभी मैकेनिक वर्कशॉप और ट्रांसपोर्टर्स को शिफ्ट किया जाना था। यहां पर प्रशासन ने रातों-रात जमीन के दाम बढ़ा दिए जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने यहां शिफ्ट होने से मना कर दिया। उन्हें 200 रुपए प्रति वर्गफीट पर जमीन दिए जाने का वादा किया गया था, लेकिन बाद में प्रशासन ने यहां पर जमीन का रेट करीब 1400 रुपए तय कर दिए, जिससे विरोध शुरू हो गया।
फिश मार्केट- शहर में जगह-जगह खुली मछली की दुकानों को व्यवस्थित तरीके से शिफ्ट करने के लिए बाघराज वार्ड में फिश मार्केट बनाया गया था। यहां पर तहसीली, संजय ड्राइव, रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नंबर दो के सामने,राहतगढ़ बस स्टैंड समेत अन्य स्थानों पर मछली बेचने वालों को शिफ्ट किया जाना था। करीब 8 करोड़ की लागत से इस मार्केट का निर्माण कराया, लेकिन एक दिन भी यहां पर मछली मार्केट संचालित नहीं हुआ। वर्तमान में यहां से कचरा कलेक्शन की गाडिय़ां संचालित की जा रहीं हैं।
फ्रूट मार्केट- कटरा बाजार की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए फल विक्रेताओं को पुरानी सब्जी मंडी में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया था। यहां पर करीब 2 करोड़ की लागत से फ्रूट मार्केट तैयार किया गया। दुकानों का आवंटन भी हुआ लेकिन कटरा बाजार के हालात आज भी जस के तस हैं। फल विक्रेता सड़कों पर ही ठेला लगा रहे हैं।
शहर को व्यवस्थित करने के लिए जो भी पूर्व से योजनाएं व प्रोजेक्ट चल रहे हैं, हम उनका लगातार अध्ययन कर रहे हैं। जहां भी कमी रह गई थी उसको पूर्ण करेंगे। प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों से बात करके शहर को व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रयास करेंगे। - राजकुमार खत्री, निगमायुक्त सह ईडी, एसएससीएल
Updated on:
06 Jul 2024 04:15 pm
Published on:
06 Jul 2024 04:14 pm
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