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अधिग्रहण से कई किसानों की जा रही पूरी जमीन, सिर्फ बचेगा मकान, नहीं बचेगा आय का साधन

किसान नोटिस मिलने के बाद स्टे लेने हाइकोर्ट जाने की तैयारी में, किसान लगातार जता रहे हैं विरोध

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Due to acquisition, the entire land of many farmers will be taken away, only the house will be left, there will be no source of income.

फाइल फोटो

बीना. रिफायनरी विस्तार के लिए उद्योग विभाग ने भांकरई, आगासौद, दोनमड़ी, पुरैना और हांसुआ की करीब 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसका विरोध किसान कर रहे हैं। किसानों को नोटिस और स्वीकृत-पत्र भेजे जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार सभी गांवों के सौ से ज्यादा किसानों की 500 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है और यह अधिग्रहण उद्योग विभाग करेगा। शुरुआत से ही इसका किसान विरोध कर रहे हैं। अब इसके लिए नोटिस भी जारी किए जाने लगे हैं। किसानों ने नोटिस लेने के बाद हाइकोर्ट जाने का मन बना लिया है। किसानों की मांग है कि उन्हें 50 लाख रुपए एकड़ मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा की व्यवस्था की जाए। इन गांवों के तीस से ज्यादा किसान ऐसे भी है, जिनकी पूरी जमीन जा रही है, जिससे सिर्फ उनके मकान बचेंगे और जो मुआवजा शासन ने तय किया है, उससे फिर से जमीन भी नहीं खरीद पाएंगे। ऐसे किसानों का कहना है कि जमीन जाने के बाद उनके पास आय के कोई साधन नहीं बचेंगे, तो गांव में रहकर क्या करेंगे।

परिवार की 28 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण
ग्राम भांकरई के किसान जितेन्द्र सिंह ने बताया कि उनके परिवार की पूरी 28 एकड़ जमीन का अधिग्रहण होना है। जमीन जाने के बाद गांव में सिर्फ मकान बचेगा। जो मुआवजा देना तय हुआ है उससे आसपास जमीन भी नहीं खरीद पाएंगे। किसानों को उनकी मांग के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए, जिससे दूसरी जगह जमीन और मकान खरीद सकें। भांकरई गांव में मुलायम सिंह, वीरसिंह, राजाभाई, नरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, बलराम सिंह, संतराम सिंह, रामस्वरूप, रामदास अहिरवार, रामबकील, मीरा बाई की पूरी जमीन जा रही है। यही स्थिति अन्य गांवों में भी बन रही है।

पूर्व में जमीन देने वाले किसान हैं परेशान
रिफायनरी के लिए हुए जमीन अधिग्रहण में जिन किसानों की जमीन गई थ और किसानों का आरोप है कि उनके परिवार के सदस्यों को स्थायी नौकरी नहीं मिली है, इसके लिए वह हाइकोर्ट तक जा चुके हैं। पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी किसानों से मिलने के लिए आए थे। किसानों ने बताया था कि 55 पट्टेधारियों की जमीन गई थी, जिसमें 11 को मुआवजा तक नहीं मिला है।

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