महापौर का झूठ: वाहवाही लूटने सागर से खरीदे पंप को बता रहे अहमदाबाद का
शहर में जल संकट गहराने पर महापौर दरे ने पानी लिफ्टिंग के लिए अहमदाबाद से दो पंप खरीदने की बात कही थी।लेकिन हकीकत में ननि ने अहमदाबाद से एक भी पंप नहीं खरीदा जो पंप अहमदाबाद के बताए जा रहे हैं वे सागर से ही खरीदे गए हैं।
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सागर.जून के पहले सप्ताह में शहर में जल संकट गहराने पर महापौर अभय दरे ने पानी लिफ्टिंग के लिए अहमदाबाद से दो पंप खरीदने की बात कही थी और उसके बाद शहर में यह भी प्रचारित किया गया कि अहमदाबाद के पंपों से राजघाट बांध में पानी की लिफ्टिंग की जा रही है लेकिन पड़ताल में हकीकत कुछ और निकली है। ननि ने अहमदाबाद से एक भी पंप नहीं खरीदा है। जो पंप अहमदाबाद के बताए जा रहे हैं वे सागर से ही खरीदे गए हैं। पत्रिका ने इस मामले में निगमायुक्त कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने सवाल किया तो उन्होंने बताया कि अहमदाबाद से कोई पंप नहीं खरीदा गया है। विपक्ष ने भी महापौर की घेराबंदी तेज कर दी है।
कहा था 50 एचपी, लगे हैं 30 एचपी
अहमदाबाद के पंपों की क्षमता 50-50 हॉर्स पॉवर बताई गई थी लेकिन बांध में लगे पंपों की क्षमता 30-30 एचपी है। सामान्यत: बड़े एचपी के पंप खरीदने पर ब्रांडेड कंपनी की मशीनरी ही खरीदी जाती है लेकिन ननि प्रशासन ने लोकल कंपनी का पंप खरीदे हैं।
एक पंप हुआ खराब महापौर माफी मांगें
शहर से ही खरीदे गए दो पंपों में से एक पंप दो या तीन दिन चलने के बाद खराब हो गया था। बांध में बिजली की घटिया केबल का उपयोग किया गया है। विपक्ष अब महापौर से मांग कर कर रहा है कि वे इसके लिए शहरवासियों से माफी मांगें।
पानी को सही माप लेते तो नहीं बहाने पड़ते लाखों रु...
राजघाट बांध में हर महीने कितना पानी कम हो रहा है और मई-जून के महीने में शहर को बांध से जलापूर्ति करने क्या साधन जुटाने होंगे, इसे लेकर नगर निगम के जनप्रतिनिधि और अफसर कोई सटीक विजन (दृष्टिकोण) नहीं बना सके। नगर निगम में विपक्ष के नेता अजय परमार का आरोप है कि निगम प्रशासन की लापरवाही के कारण शहर को इस मामले में 50 लाख रुपए से ज्यादा का चूना लगने का अनुमान लगाया जा रहा है।
विपक्ष का आरोप
- महापौर और जल प्रदाय विभाग से जुड़े लोग विजन स्पष्ट नहीं कर पाए कि राजघाट में क्या करना चाहिए।
- विपक्ष पहले से कहता आ रहा है कि बांध में पानी पर्याप्त है, सिर्फ प्रबंधन में कमी है।
- पानी लिफ्टिंग के लिए बड़े पंप लगाने थे। छोटे-छोटे पंप लगाकर खेल किया गया।
- कृत्रिम जलसंकट टैंकर से जल सप्लाई करने के लिए ही पैदा किया गया था। दिल्ली की तरह यहां भी पानी में भ्रष्टाचार निकलेगा।
महापौर का बचाव
- विजन ही था कि पेयजल संकट की स्थिति बनेगी। इसलिए दो दिन छोड़कर और फिर बाद में तीन दिन छोड़कर।
- इनलेट से पानी दूर हो रहा था तो इंटकवेल तक पानी पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर पंप, बिजली पंप की व्यवस्था पहले से ही पानी लिफ्टिंग के लिए की गई।
- जनवरी से प्रयास शुरू किए। आर्मी को एक बार पानी देने के बाद मना किया था। शहर में पानी की समस्या न हो इसके लिए टैंकर की सुविधा उपलब्ध कराई गई।