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दहेज हत्या में सास, ससुर, पति, देवर को दस वर्ष का कारावास

मामला 2015 का, प्रताड़ित होकर की थी महिला ने मायके में आत्महत्या, एक आरोपी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने में पाया दोषी

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Mother-in-law, father-in-law, husband, brother-in-law sentenced to 10 years imprisonment in dowry murder case

Right to be Forgotten (Image: Patrika)

बीना. दहेज हत्या के मामले में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार कुन्दु ने सास, ससुर, पति और देवर को दस वर्ष के सश्रम कठोर कारावास की सजा सुनाई है और अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में कुल छह आरोपी थे, जिसमें एक को दोषमुक्त किया गया है और एक आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोषी पाया गया है, जिसमें तीन साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे जमानत मिल गई है।
अपर लोक अभियोजक श्यामसुंदर गुप्ता ने बताया कि 7 सितंबर 2015 को फरियादी राघवेन्द्र तिवारी ने बीना पुलिस थाना में सूचना दी थी कि उसकी बेटी पूजा की शादी 1 जुलाई 2014 को रायपुर निवासी अनिल मिश्रा के साथ हुई थी। पूजा का पति बीना में शुभ रिश्ते नाम से संस्था चलाता था। घटना के दो दिन पहले वह अपनी बेटी को ससुराल से घर लेकर आए थे और तभी पूजा ने ससुराल वालों द्वारा परेशान करने की बात बताई थी। इसके बाद रात में पूजा ने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। न्यायालय में 9 वर्ष तक विचारण और अपर लोक अभियोजक के द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्य और तर्क के आधार पर पति अनिल मिश्रा निवासी डीपी होम, आमलीडी रायपुर छत्तीसगढ़, ससुर जीवनलाल मिश्रा, सास चंदाबाई मिश्रा, देवर सुनील उर्फ सोनू मिश्रा को दहेज हत्या की धारा 304 बी के तहत दोषी पाते हुए दस वर्ष के सश्रम कठोर कारावास की सजा सुनाई और सभी को खुरई उप जेल भेजने का आदेश दिया। वहीं, अनिल के साथ संस्था में काम करने वाले धर्मेन्द्र कंसोरिया निवासी मस्जिद वार्ड बीना को धारा 306 में दोषी पाते हुए तीन वर्ष की सजा सुनाई गई, जिसे जमानत मिल गई। मामले के छठवें आरोपी अवधेश प्रताप सिंह, जिसकी शादी कराने में भूमिका थी, उसे साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त किया गया है।