
विदेशों में बढ़ी मध्य प्रदेश की चांदी की चमक।
MP News: शहर में बने चांदी के डिनर सेट, मूर्ति और बड़े-बड़े सिंहासन समेत अन्य आइटम की मांग देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बढ़ रही है। यहां के कारखानों में बन रहे चांदी के आइट को यूएसए और कनाडा में विशेष रूप से पसंद किया जा रहा है। सागर से उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सबसे ज्यादा आइटम भेजे जाते हैं, जहां से ये पूरे देश और दुनिया में सप्लाई होते हैं। चांदी के कारोबार में सागर प्रदेश की दूसरी बड़ी मंडी के रूप में पहचाना जाता है।
यहां पर 150 साल से चांदी के आभूषणों पर काम हो रहा है। वर्तमान में गांधी चौक, मोहननगर, रविशंकर, सूबेदार और चकराघाट वार्ड में लगभग 200 कारखाने संचालित हो रहे हैं। इनमें 4 हजार से अधिक कारीगर दिन-रात आभूषणों को नया रूप देने में लगे हैं। पायल, बाजूबंद, तोड़ा, करधनी, बिछड़ी के साथ ही चांदी की प्रतिमाओं सहित अन्य आभूषण भी बनाए जा रहे हैं।
सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सोनी का कहना है कि चांदी के इसी कारोबार की वजह से व्यापारी लगातार सिल्वर प्लाजा की मांग कर रहे हैं। सिल्वर प्लाजा में कारखाने और दुकानें एक क्षेत्र में रहेंगे। शहर में हर माह लगभग 300 करोड़ का चांदी का कारोबार होता है।
चांदी को खास बनाने वाले यहां के कारीगर हैं। चांदी पर बारीक नक्काशी सागर की पहचान है। चांदी पर छोटी छैनी और हथोड़े से घंटों तक कारीगर बर्तन और मूर्ति को आकार देने में लगे रहते हैं। मांग के अनुरूप ये हर तरह की नक्काशी करने में सक्षम हैं। खास बात यह है कि इसमें मशीनरी का बिलकुल भी उपयोग नहीं किया जाता है।
मध्य प्रदेश के सागर शहर के कारीगर रामकुमार ने बताया कि जो हैंडमेड काम 150 साल पहले होता था, हम वही आज के दौर में कर रहे हैं। विदेशों में इसी काम को पसंद किया जा रहा है। गुणवत्ता भी 95 से 98 प्रतिशत तक होती है, जिसका हॉलमार्क भी लगाते हैं।
Updated on:
17 Jun 2024 11:14 am
Published on:
17 Jun 2024 11:09 am
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
