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सागर. किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का जादू कैसे सिर पर चढ़कर बोलता है, इसकी बानगी बुधवार को नगर निगम सभाकक्ष में आयोजित हुई निगम परिषद की बैठक में देखने को मिली। सीवर लाइन निर्माण एजेंसी लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग के ठेकेदार मनीष शाह के सामने लगभग सभी नेता नतमस्तक दिखे।
सत्ता पक्ष हो या विपक्ष सभी ने ठेकेदार के काम पर संतुष्टि जाहिर की। कुछ नेताओं ने विरोध भी किया, लेकिन इसमें भी विरोधाभास का भाव ज्यादा रहा। करीब सात महीने पहले आयोजित हुई परिषद की बैठक में निगम के सभी नेताओं ने एकजुट होकर ठेकेदार को उल्टा लटका देने की बात कही थी, लेकिन बुधवार को ३०० करोड़ की योजना से कुछ नेता इतने खुश दिखे कि शहर भर से आ रही शिकायतों को भी बैठक में नजरअंदाज कर दिया गया।
महापौर अभय दरे पूरी तरह से ठेकेदार के समर्थन में दिखे। नेता प्रतिपक्ष अजय परमार ने चिर-परिचित तरीके से विरोध किया। निगमाध्यक्ष राजबहादुर सिंह ने इस बार सिर्फ आसंदी की भूमिका ही निभाई। वरिष्ठ पार्षद नरेश यादव ने अंत: में ठेकेदार समेत निगम अधिकारियों व नेताओं को हकीकत का आईना दिखा दिया।
जब जानकारी नहीं तो परिषद को बंद करो...
जल प्रदाय विभाग, पीडब्ल्यूडी जैसे विभागों से सही जानकारी न मिलने पर निगमाध्यक्ष सिंह ने निगमायुक्त वर्मा से दो टूक शब्दों में कहा कि जब आप लोगों के पास कोई जानकारी नहीं है तो फिर इस परिषद की बैठक को ही बंद करो। इस तमाशा को बंद करो। निगमाध्यक्ष इन तेवर के बाद सदन में सन्नाटा पसर गया।
अधिकारियों को लगाई फटकार
निगमाध्यक्ष ने इंजीनियरों को जानकारी न होने पर फटकार लगाई और कहा कि क्या सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करने के लिए ही हो। इसके बाद उन्होंने निगमायुक्त की भी खिंचाई की, जिस पर निगमायुक्त वर्मा ने कहा कि क्या मैं काम नहीं कर रहा हूं। काम करवाने के लिए अच्छे स्टाफ की जरुरत भी पड़ती है जो हमारे पास नहीं।
ठेकेदार व अफसरों ने गायब किया पत्र
परिषद को ठेकेदार शाह ने बताया कि अब तक शहर में ४० किमी सड़क बिछ चुकी है, जिसमें ३७ किमी में रोड का रेस्टोरशन हो चुका है। १० साल तक हमें ही मैनटेंनेंस करना है। यह बात सुनते ही पीडीएमसी वाली एजेंसी एजेज को नेताओं ने निशाना बना लिया और फिर कंपनी द्वारा कार्य में लापरवाही बरतने पर उसका भुगतान रोकने के लिए भोपाल को पत्र लिखने का निर्णय लिया। इधर सीवर एजेंसी पर ईएनसी प्रभाकांत कटारे ने पिछले वर्ष निरीक्षण के दौरान करीब सवा करोड़ रुपए का जुर्माना ठोकने के निर्देश दिए थे लेकिन बैठक में चर्चा हुई कि यह पत्र ठेकेदार व निगम अफसरों की मिलीभगत से गायब कर दिया गया है।
कर वसूली ठप पर परिषद की मुहर
2018-19 के लिए संपत्तिकर, समेकित कर, शिक्षा उपकर एवं नगरीय विकास उपकर के संबंध में नेता प्रतिपक्ष परमार एवं अन्य पार्षदों ने आपत्ति ली। परमार ने अफसरों को लापरवाहियां गिनाई जिसके बाद उपायुक्त आरपी मिश्रा ने अपनी गलती मानी। अंत में महापौर दरे ने कहा कि ई-नगर पालिका के कारण निगम के सभी करों के बिलों का वितरण नहीं हो पाया है। इसलिए इस बार राजस्व की बड़ी हानि हुई है। संपत्तिकर के बिलों में अगर कोई आपत्ति आती है तो उसका समय पर निराकरण करते हुए बिल में सुधार करेंगे। जलकर के बिलों में 31 मार्च तक बिल की राशि जमा करने पर एक वर्ष के सरचार्ज में छूट देने का निर्णय लिया गया।
कर्मचारियों पर ये हुआ निर्णय
नगर निगम में पदस्थ स्थायीकर्मी कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान चिकित्सा भत्ता दिए जाने के लिए शासन से मार्गदर्शन लेने का निर्णय लिया गया। अंशकालीन दर पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों को कलेक्टर दर के समकक्ष वेतन दिये जाने की घोषणा की पुष्टि की गई।
राजघाट बांध पर घिसे-पिटे निर्णय
राजघाट को लेकर पुराने घिसे-पिटे निर्णय हुए। पूर्व की भांति इस बार भी चार टीमें लीकेज के लिए बनाई जाएंगी। महापौर ने जल बचाओ अभियान की घोषणा की। महापौर ने ही खुलासा किया कि कुछ पार्षद बाल्वमेनों पर दबाव बनाकर वार्ड में पेयजल सप्लाई निर्धारित समय से ज्यादा करवाते हैं। एेसा गलत काम करने वाले पार्षद चेत जाएं नहीं तो अगली परिषद में उनके नामों का खुलासा करेंगे। विपक्ष की पार्षद किरण मिश्रा, विनोद सोनी ने एलम की गुणवत्ता पर प्रश्नचिंह लगाए और पूरी परिषद को एलम की जगह उपयोग होने वाले पत्थर के टुकड़े दिखाए। इतना सब होने के बाद जिम्मेदारों ने हमेशा की तरह जांच की बात कहकर मामला टाल दिया।
परिषद में हुआ लेकिन किसी को नहीं दिखा
१ परिषद की बैठक १२.१५ बजे से शुरू हुई लेकिन एजेंडा पर १.४० बजे से चर्चा हुई। इस दौरान सभी पार्षद अन्य मामलों पर चर्चा करते रहे।
२ बैठक के दौरान तीन बार बिजली गुल हुई। जैसे ही सीवर लाइन पर चर्चा शुरू हुई तो फिर बिजली गुल हो गई और चर्चा पूर्ण होते ही फिर आ गई।
...तो इसलिए इन्होंने डाल दिए हथियार
महापौर अनजान ...क्योंकि सीवर के मामले में नहीं सुनना चाहते हकीकत
नेता प्रतिपक्ष उदार ...क्योंकि हर मामले की जानकारी और पकड़ रखते हैं
निगमाध्यक्ष शांत ...क्योंकि इस बार ठेकेदार से शिकायत नहीं
पार्षद तो खुश ...क्योंकि किसी ठेकेदार से पहली बार मिली तवज्जो
आयुक्त असहाय ...क्योंकि अधीनस्थ स्टाफ किसी काम का ही नहीं है
डायलॉग ऑफ द डे
& महापौर निरीक्षण के लिए वार्डों में जाते हैं, ताली बजवाकर वापस आ जाते हैं। महापौर घोषणाओं को पूरा करें। - किरण मिश्रा, पार्षद
& चार महीने में बैठक कर रहे। एेसा करो कि साल में एक बार ही बैठक करो। दो महीने का नियम बदल दो। राजीव आवास योजना में निगम ने जनता को सिर्फ ठगा है।
- अजय परमार, नेता प्रतिपक्ष
& एक महीने से वार्ड में पानी नहीं पहुंच रहा। ५ लाख की पाइपलाइन फोड़ डाली, निगम ने अब तक क्या कर लिया। - पुष्पा पटेल, पार्षद
& जंगल में जानवरों की गिनती होती है कभी शहर में भी गिनती हो जाए कि कितने आवारा सांड व मवेशी हैं।
- परषोत्तम विश्वकर्मा, पार्षद
इस बॉटल के लिए निगम का धन्यवाद
& निगम प्रशासन का धन्यवाद जो हमें बिसलरी का पानी पिलवा रहे हैं, वहां पूरे शहर को हम ही दूषित पानी पिलवा रहे हैं।
- नरेश यादव, वरिष्ठ पार्षद
Published on:
01 Mar 2018 04:19 pm
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