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MP के सागर में भरभराकर गिरा निर्माणधीन पुल, एक मजदूर की दर्दनाक मौत

Bridge Collapses: एमपी के सागर में निर्माणधीन पुल की बीम बीच में से टूटने के कारण एकाएक नीचे गिर गया। इस हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई।

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सागर

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Akash Dewani

May 31, 2026

Under-construction bridge collapses in sagar killing one worker mp news

Under-construction bridge collapses in sagar (फोटो-Patrika.com)

Bridge Collapses: मध्य प्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील के ग्राम बड़गान के पास पुल और सेतु निर्माण के दावों की पोल खोलने वाली एक बेहद गंभीर घटना सामने आई है। यहां देहार नदी के पर बन रहे एक निर्माणाधीन पुल का स्लैब शनिवार रात अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के वक्त पुल के पिलर पर पांच मजदूर फंस गए थे जिन्हें काफी मशक्कत के बाद सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। प्रमुख निर्माण एजेंसी मप्र सेतु निर्माण निगम के अंतर्गत लगभग 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर निर्माण एजेंसी के रूप में गुजरात की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी काम कर रही है।

तय योजना के मुताबिक निर्माण एजेंसी को इस पूरे पुल निर्माण कार्य को दिसंबर 2027 तक पूरा करना है। लेकिन प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही, पहली ही 'गर्डर लॉन्चिंग' (बीम को पिलर पर रखने) के दौरान एक विशालकाय हाइड्रोलिक क्रेन अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे लाखों रुपये की भारी बीम भरभराकर नीचे आ गिरी और 'ठीक बीच से' दो टुकड़ों में टूट गई।

क्रेन ऑपरेटर का बड़ा खुलासा

हादसे के बाद अब मुख्य निर्माण एजेंसी मप्र सेतु निर्माण निगम के अधिकारी और ठेकेदार बी.डी. पटेल का अमला मिलकर सारा दोष क्रेन ऑपरेटर पर मढ़ने की कोशिश कर रहा है और सवालों के गोल मोल जबाव दें रहें हैं। दुर्घटनाग्रस्त क्रेन के ऑपरेटर ने सीधे तौर पर निर्माण एजेंसी और विभागीय इंजीनियरों के भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। ऑपरेटर का दावा है कि क्रेन ने सही तरीके से लोड उठाया था, लेकिन बीम की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि हवा में उठते ही वह 'ठीक बीच से' क्रैक होकर टूट गई।

गुजरात की कंपनी के इंजीनियर की सुरक्षा मानकों का पता नहीं

रहली के बड़गान में चल रहे इस घोर लापरवाही का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब मौके पर मौजूद गुजरात की कंपनी के साइट इंजीनियर से यह पूछा गया कि साइट पर 'सेफ्टी इंजीनियर' कौन है। निर्माण एजेंसी के साइट इंजीनियर को यह तक नहीं मालूम था कि सेफ्टी इंजीनियर कौन होता है और उसका काम क्या है। नियमों के अनुसार, 10 करोड़ के इतने बड़े प्रोजेक्ट और क्रिटिकल लिफ्टिंग के समय एक प्रमाणित सेफ्टी ऑफिसर और पर्याप्त रोशनी का होना अनिवार्य है। लेकिन यहां निर्माण एजेंसी द्वारा नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी सेफ्टी ऑडिट के, रात के अंधेरे में भगवान भरोसे काम चलाया जा रहा था।

पुलिस ने कहा ये

कई बार फोन लगाने के बाद सेतु निगम की अधिकारी ने बताया की ज्यादातर गलती क्रेन मशीन व उसके ड्राइवर की समझ मे आ ही है लेकिन ठेकेदार पर भी कार्यवाही होगी।- साधना सिंह,एसडीओ,मप्र सेतु निर्माण निगम सागर