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मिनी मैहर के नाम से प्रसिद्ध है मां सिंहवाहिनी, 700 साल पुराना है मंदिर

रहली की टिकीटोरिया वाली माता का धाम...। मंदिर का निर्माण रानी दुर्गावती ने करवाया था...।

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सागर

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Manish Geete

Sep 29, 2022

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पंकज शर्मा

रहली। टिकीटोरिया पहाड़ी पर विराजमान मां सिंहवाहिनी के इस मंदिर को मध्यप्रदेश में मिनी मैहर के नाम से जाना जाने लगा है। टिकीटोरिया के मुख्य मंदिर में अष्टभुजाधारी मां सिंह वाहिनी की नयनाभिराम प्रतिमा है। मंदिर का निर्माण सुनार नदी के तट पर स्थित किले के समकालीन ही करीब 700 वर्ष पहले हुआ था।

मंदिर का निर्माण रानी दुर्गावती द्वारा करवाया गया। यहां पर पत्थर की मूर्ति स्थापित की गई। करीब 55 साल पहले नगर के वरिष्ठ मातादीन अवस्थी और द्रोपदी बाई के सौजन्य से सुरेन्द्र नाथ अवस्थी द्वारा संगमरमर की नयनाभिराम मूर्ति की स्थापना करायी गयी। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि करीब दो से तीन बार मंदिर में चोरी का प्रयास किया गया जिसमें माता की प्राचीन प्रतिमा को भी क्षति पहुंचाई गई। जिसे करीब 2 से 3 वर्ष पहले जीर्णोद्धार समिति द्वारा बदला गया और विधि विधान से पुन: प्राण प्रतिष्ठा की गई।

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पहाड़ को चढने बनाई सीढ़ियां

लगभग 35 साल पहले यहां पहाड़ काटकर मिट्टी से सीढ़िया बनायी गयी थीं फिर पत्थर रख दिये गये और सन 1984 में जीर्णोद्धार समिति का गठन किया गया। वर्तमान में जनसहयोग से मंदिर मे ऊपर तक जाने के लिए 365 संगमरमर की सीढ़ियां हैं। जीर्णोद्वारा समिति बनने के बाद से अभी तक पं अवधेश हजारी समिति के अध्यक्ष हैं।

मंदिर परिसर एक नजर में

टिकीटोरिया के मुख्य मंदिर के सामने ही ऊंचाई पर शंकर जी का मंदिर बना है तथा मंदिर के दाहिनी ओर से एक गुफा है जिसमें राम दरबार तथा पंचमुखी हनुमान जी की विशाल प्रतिमा है। मंदिर के पीछे यज्ञशाला और भैरव बाबा का मंदिर भी है। टिकीटोरिया का पहाड़ सागौन के वृक्षों से भरा है। मंदिर के पुजारी भरत शुक्ला के अनुसार ऐसी मान्यता है कि टिकीटोरिया में मां भवानी के दरबार में आकर मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। कैलाश रैकवार ने बताया कि मां के दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मन्नत पूरी होती है लोग रोते रोते आते है हंसते हंसते जाते हैं।