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नीलगाय का शिकार करने वाले आरोपी को नहीं मिली जमानत

इस मामले के दो अन्य आरोपी पहले से ही जेल में हैं

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Tehsildar imposes penalty of 61 thousand

Nilgai's victim does not get bail police crime

सागर. पंचम अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार की अदालत ने नीलगाय का शिकार करने वाले एक आरोपी की जमानत खारिज कर दी है। इस मामले के दो अन्य आरोपी पहले से ही जेल में हैं। वन विभाग के विशेष लोक अभियोजक ब्रजेश दीक्षित ने बताया कि वन परिक्षेत्र राहतगढ में हुए नीलगाय के शिकार के मामले में आरोपी आमिर वल्द वसीम खान निवासी केवड़ेबाग भोपाल 28 को वन विभाग ने गिरफ्तार किया था। आरोपी द्वारा जमानत आवेदन पंचम अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार की अदालत में पेश किया गया था। जहां अभियोजन पक्ष से सहमत होते हुए न्यायाधीश ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करके जेल भेज दिया है। 11-12 फरवरी २०१८ की दरम्यानी रात राहतगढ़ वन परिक्षेत्र में नीलगाय का शिकर किया गया था। नीलगाय का मांस लेकर आरोपी जब तलैया थाना भोपाल से गुजरे तो पुलिस ने चैकिंग के दौरान दबोच लिया।
आरोपियों से एक लायसेंसी बंदूक, 65 किलो नीलगाय का मांस भी जब्त हुआ था।
अपील खारिज, छेड़छाड़ के दोषी की सजा बरकरार
सागर. न्यायालयीन मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्वारा छेड़छाड़ के आरोपी को एक साल का कारावास व ५०० रुपए जुर्माना के खिलाफ जिला कोर्ट में लगाई गई अपील को खारिज कर अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को सही ठहराया गया है। जिला अभियोजक राजेश त्रिवेदी ने बताया कि संतोषपुरा सुभाषनगर वार्ड निवासी २४ वर्षीय महिला २ दिसंबर २०१६ की शाम ६ बजे सार्वजनिक शौचालय से लौट रही थी। तभी पुलिया के पास वार्ड के ही राजू १९ वर्ष पिता कैलाश अहिरवार ने उसे रोककर उसके साथ अश्लील बातें कीं। जब महिला ने उसे टोका तो आरोपी ने उसे पकड़ लिया, जिससे महिला के कपड़े भी फट गए। चीख सुनकर उसका पति व अन्य लोग वहां पहुंचे, तो आरोपी वहां से भाग गया। घटना की शिकायत मोतीनगर थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला कायम कर उसे न्यायालयीन मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सागर के यहां पेश किया, जहां साक्ष्य व सबूतों के आधार पर न्यायाधीश पदमा जाटव ने ९ जनवरी २०१८ को राजू अहिरवार को दोषी मानते हुए एक साल का कारावास व ५०० रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। फैसले के खिलाफ आरोपी ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश एसके शर्मा की कोर्ट में अपील की, जहां उसकी अपील खारिज करते हुए अधीनस्थ कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया है।