
परिसर से बाहर खड़े इ-रिक्शा
बीना. रेलवे स्टेशन पर सवारी लेने के लिए आने वाले इ-रिक्शा चालकों के लिए स्टेशन परिसर में एंट्री नहीं है। इ-रिक्शा चालक स्टेशन परिसर के बाहर खड़े होकर ही यात्रियों के आने का इंतजार करते हैं। परिसर के अंदर केवल ईंधन से चलने वाले ऑटो के लिए ही आने दिया जाता है, जो यात्रियों को शहर तक लेकर आते हैं। इस विरोधाभास की स्थिति में अभी तक रेलवे के आलाधिकारी कोई समाधान नहीं करा पाए हैं, जिससे इ-रिक्शा चालक परेशान हैं।
दरअसल शहर में ऑटो चालकों की कमाई का मुख्य जरिया स्टेशन जाने व आने वाली सवारियां होती हैं। सरकार पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से बैटरी से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दे रही है और इसके बाद शहर में भी बड़ी संख्या में लोगों ने अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए इ-रिक्शा खरीद लिए हैं, लेकिन इन रिक्शों के लिए ऑटो यूनियन रेलवे स्टेशन परिसर में अंदर नहीं आने देती है और वह स्टेशन के बाहर खड़े रहते हैं। इस दौरान ईंधन से चलने वाले ऑटो सवारियां लेकर चले जाते हैं और फिर जो सवारियां बचती हैं वह इ-रिक्शा चालकों को मिलती हैं।
तीन-तीन घंटे करते हैं इंतजार
ऑटो यूनियन के सदस्यों का कहना है कि इ-रिक्शा चालक स्टेशन आकर सवारी छोड़ते हैं और तत्काल सवारी लेकर शहर जाने के लिए तैयार रहते हैं। जबकि ऑटो यूनियन के सदस्य तीन-तीन घंटे तक अपना नंबर आने का इंतजार करते हैं। इस हिसाब से उनके लिए नुकसान होता है।
रेलवे अधिकारियों को निकालना पड़ेगा हाल
इस प्रकार की स्थिति से ईंधन से चलने वाले ऑटो और इ-रिक्शा चालकों का भी नुकसान हो रहा है। इ-रिक्शा के स्टेशन परिसर से बाहर खड़े होने के कारण कई यात्री अंदर से बाहर तक पैदल आ जाते हैं और जल्दी जाने के लिए इनमें सवार हो जाते हैं। साथ ही इ-रिक्शा चालक ज्यादा सवारी मिलने का भी इंतजार नहीं करते हैं और शहर तक सवारी लेकर आ जाते हैं।
Published on:
16 Sept 2024 12:42 pm
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