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बुंदेलखंड के इस जिले में कलेक्टर के दर से ही प्यासे लौट रहे फरियादी

आवेदकों को या तो पानी के लिए यहां-वहां भटकना पड़ता है या फिर उन्हें प्यासे ही अपनी फरियाद सुना कर घर लौटना पड़ता है।

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Not even a single water cooler in the collectorate complex

Not even a single water cooler in the collectorate complex

सागर. कलेक्टर के पास दूर गांव से कड़ी धूप में अपनी फरियाद लेकर आने वाले लोगों को पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। इसके कारण आवेदकों को या तो पानी के लिए यहां-वहां भटकना पड़ता है या फिर उन्हें प्यासे ही अपनी फरियाद सुना कर घर लौटना पड़ता है। इतना ही नहीं सबसे ज्यादा फजीहत तो दिव्यांगजनों की होती है, क्योंकि उन्हें कलेक्टर ऑफिस में रैम्प न होने के कारण सीढि़यों से ही चढ़कर जाना पड़ता है। पानी के लिए वैसे तो कलेक्टर परिसर के बाहर मंदिर में मटके रखे हुए हैं, लेकिन कई आवेदकों इसकी जानकारी न होने के कारण वह उसका लाभ भी नहीं ले पाते हैं।
कलेक्टर द्वारा आम जन की फरियाद सुनने के लिए सप्ताह के हर मंगलवार को जनसुनवाई कार्यक्रम किया जाता है, जिसमें जिले भर से सौ से अधिक लोग आते हैं। इन फरियादियों के साथ उनके परिजन या सहायक भी होते हैं। ज्यादातर आवेदक दूर गांव के होते हैं। जो सुबह घर से निकलते हैं। गर्मी का आलम यह है कि अगर व्यक्ति भरी दोपहर में छांव में भी बैठा है तो उसे हर २० मिनट में प्यास लगना स्वाभाविक है। एेसे में फरियादियों के लिए कलेक्टर परिसर तो ठीक नजूल व सिटी मजिस्टे्रट के कार्यालय के आसपास कहीं पर भी पानी की व्यवस्था नहीं है।
सर्किट हाउस से कलेक्ट्रेट की ओर आते समय ट्रेजरी ऑफिस के पास मंदिर में गर्मियों के दिनों में मटके रखे जाते हैं, लेकिन जनसुनवाई के समय होने वाली भीड़ में इन मटकों में रखा पानी भी दोपहर होने से पहले ही खत्म हो जाता है।
वहीं कलेक्ट्रेड में अधिकांश फरियादी पीली कोठी या कचहरी की ओर से आते हैं। जो उस दिशा से कलेक्टर कार्यालय में आकर वहीं से बाहर निकल जाते हैं। सूत्रों की मानें तो एक शासकीय बैंक द्वारा कलेक्टर भवन के बाहर एक वाटर कूलर लगाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन को दिया गया था, लेकिन यहीं के कुछ अधिकारियों ने नियम-कायदे बताकर बैंक के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
मुखिया के दर पर दिव्यांग परेशान
वैसे तो सुप्रीम कोर्ट के यह स्पष्ट निर्देश हैं कि शासकीय संस्थाओं में दिव्यांगों को आने-जाने के लिए रैम्प का निर्माण अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। लेकिन कलेक्टर कार्यालय में ही इसका पालन नहीं हो रहा है। दिव्यांगों को मशक्कत कर कलेक्टर कार्यालय की सीढि़यां चढ़कर भवन में जाना पड़ता है।

पिछले साल एक वाटर कूलर रखा था, जो कि खराब हो गया है। एक या दो दिन में ठण्डे पानी की व्यवस्था के लिए कुछ प्रबंध कर दिया जाएगा। दिव्यांगों के लिए जल्द ही रैम्प बनवाया जाएगा। - आलोक सिंह, कलेक्टर