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शहर में सालों से नहीं हुई मकानों की नंबरिंग, लोगों को नहीं पता क्या है उनका मकान नंबर

वार्डों के नाम से करना पड़ता है लोगों को घर का पता, होते हैं परेशान

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Numbering of houses has not been done in the city for years, people do not know what is their house number

Numbering of houses has not been done in the city for years, people do not know what is their house number

बीना. शहर में सभी पच्चीस वार्डों में हजारों की संख्या में मकान बने हैं, इनका पता सिर्फ वार्ड के नंबर या मोहल्ले के किसी प्रमुख स्थल तक ही सीमित है। नगर पालिका ने शहर के प्रत्येक मकान पर नंबर अंकित करने की प्रक्रिया सालों से पूरी नहीं की है, जिससे बाहर के व्यक्ति को अपने परिचित का मकान ढूंढऩे में परेशानी होती है। वहीं पोस्ट ऑफिस से वितरित होने वाली डाक को सही व्यक्ति के पते पर समय पर पहुंचाना पोस्टमेन के लिए भी चुनौती से कम नहीं है। मकान का नंबर नागरिकों को खुद नहीं पता होने से उन्हें परेशानी होती है। इस संबंध में उपयंत्री गगन सूर्यवंशी ने बताया कि इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही नंबर डालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
दो दशक में बढ़ गए हजारों मकान
शहर के किसी भी गली-मोहल्ले में पुराने व नव निर्मित मकानों पर उसका नंबर अंकित नहीं है, जिसके चलते लोग स्वयं के पते में अपना नाम, वार्ड नंबर, शहर, पिन कोड तो अंकित करते हैं, लेकिन घर का नंबर पता नहीं होने से उसे लिख नहीं पाते हैं। लगभग दो दशक में शहर की आबादी में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है। मकान पर नंबर डले होने से लोग पते के साथ नंबर भी दे सकते हैं, जिससे घर का पता तलाश करने में होने वाली दिक्कत से लोगों को निजातमिल सकेगी।
कागजों तक सीमित मकान नंबर
दूसरे शहर से बीना आने वाले रिश्तेदार जब घर के पते के साथ मकान का नंबर भी पूछते हैं, तो मकान नंबर अंकित नहीं होने से उन्हें बता नहीं पाते हैं। नगर पालिका को मकान नंबर अंकित करने की प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए। नंबर कागजों तक की सीमित हैं।
भूपेन्द्र राय, रहवासी
निजी अथवा सरकारी नौकरी के आवेदन में मकान नंबर दर्ज करने जगह खाली रहती है। आवेदन में इस बॉक्स को या तो खाली छोडऩा पड़ता है या फिर उसमें शून्य दर्ज करना पड़ता है। जब राशन कार्ड, आधार कार्ड हैं तो मकान नंबर भी हर घर का जरूर होगा।
रोशन रजक, रहवासी