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नाग पंचमी पर सिद्ध और साध्य योग का संयोग कालसर्प दोष निवारण के लिए होगी पूजा

नागपंचमी का पर्व 9 अगस्त को सिद्ध व साध्य योग में मनाया जाएगा। इस दिन दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे।

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सागर

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Reshu Jain

Aug 03, 2024

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शहर के नागेश्वर, भूतेश्वर, धनेश्वर और रामेश्वर मंदिर में होगा भगवान का विशेष शृंगार

सागर. नागपंचमी का पर्व 9 अगस्त को सिद्ध व साध्य योग में मनाया जाएगा। इस दिन दुर्लभ शिववास योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे। इस समय में शिव परिवार संग नाग देवता की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी। साथ ही नाग देवता का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा। सिद्ध योग दोपहर 01 बजकर 46 मिनट तक है। इन योग में भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से जातक को उत्तम फल की प्राप्ति होगी। पंचांग के अनुसार सावन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी 8 अगस्त को रात 12 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी और 10 अगस्त को रात 03 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में 9 अगस्त को नाग पंचमी मनाई जाएगी। इस दिन पूजा हेतु शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 01 मिनट से लेकर 08 बजकर 37 मिनट पर समाप्त होगी। नाग पंचमी पर कालसर्प दोष निवारण के लिए पूजा की जाएगी।

शिवालयों में होगा विशेष अभिषेक

पं. केशव महाराज ने बताया कि कालसर्प दोष से पीडितव्यक्ति चांदी, तांबे एवं लोहे से बने सर्प भगवान शिव को चढ़ाकर दूध व गंगाजल से अभिषेक करें। इससे बाधाओं से मुक्ति मिलेगी। इस मौके पर शहर के विभिन्न शिवालयों में भगवान शिव का विशेष अभिषेक और पूजन किया जाएगा। शहर के नागेश्वर, भूतेश्वर, धनेश्वर, रामेश्वर एवं नीलकंठेश्वर सहित विभिन्न मंदिरों में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाएगा।

कालसर्प दोष शांत करने के उपाय

मोर या गरुण का चित्र बनाकर उस पर नाग विषहरण मंत्र लिख कर 10 हजार बार जाप कर उसका दशांश हवन करने से काल सर्प योग की शांति होती है।

- भगवान विष्णु लक्ष्मी जी सहित गरुण पर विराजमान हों और गरुण के पैर में सर्प लटक रहा हो ऐसे चित्र को रोज पूजा करने से भी इस दोष की शांति होती है।

- नाग पंचमी के दिन सर्पाकार सब्जियों का सेवन न करें बल्कि उनका दान करें।

- नागपंचमी के दिन नौ नाग मण्डल का अपने घर के मुख्य द्वार पर बनाए और नित्य धूप दीप के साथ पूजन करें।

- शुद्ध चांदी का सर्प बनवाकर पूजा स्थल पर स्थापित कर नित्य प्रति पूजन करें।