
व्याख्यान में जानकारी देते हुए शिक्षक काउंसलर
बीना. शासकीय कन्या महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य एवं छात्र कल्याण के लिए पहल के अंतिम सप्ताह अंतर्गत आत्महत्या रोकथाम, जीवन कौशल, आशावादी दृष्टिकोण विषयों पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
प्राचार्य डॉ. रश्मि जैन ने कहा कि आत्महत्या एक जटिल समस्या है, जो कि मनुष्य को जीवन में आई अचानक परिस्थितियां, जिनका मनुष्य सामना करने के लिए तैयार नहीं रहता है ऐसे में मनुष्य निराश, हताश हो जाता है और आत्महत्या जैसे घृणित कार्य को कर लेता है। मुख्यत: मनुष्य मानसिक तनाव, असफलता, अकेलापन, नशा एवं गंभीर बीमारियों के चलते आत्महत्या की ओर प्रेरित होता है, हमें सदैव सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर सीधे, सरल रास्ते पर चलना चाहिए। नोडल अधिकारी डॉ. उमा लवानिया ने कहा कि आत्महत्या एक सामाजिक अपराध है, आत्महत्या व्यक्ति के द्वारा लिया गया व्यक्तिगत निर्णय है और इस निर्णय को व्यक्ति सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित होकर लेता है, इसलिए समाज की सोच में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है। आत्महत्या का विचार एक गंभीर लक्षण है जिसपर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, इसका इलाज संभव है और सही सहायता के साथ व्यक्ति ठीक हो सकते हैं, संतुष्ट जीवन जी सकते हैं। शिक्षक काउंसलरों ने इस गंभीर विषय के माध्यम से अपने-अपने विद्यार्थियों की काउंसलिंग करते हुए कहा कि मानसिक स्वस्थता के लिए नशीले पदार्थों के सेवन व तनाव से दूर रहना, अत्याधिक तनाव को जीवन में नहीं आने देना, संतुलन बनाकर चलना, सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के अनुकूल चलना, अकेलापन, गंभीर बीमारी, सामाजिक बहिष्कार, प्रियजनों की मृत्यु, बड़ा सदमा, रिश्तों का टूटना, नौकरी छूटना, अत्याधिक कार्य आदि चिंताजनक परिस्थितियों के आने पर स्वयं को सामंजस्य व संतुलित बनाकर चलना ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए। शिक्षक काउंसलरों में प्रकाशचंद, सत्यम कुर्मी, डॉ. दिनेश राय, डॉ. हरिशंकर सेन, डॉ. विशाल मिश्रा, यशवंत शर्मा, डॉ. अमन आर्य, नवीन नामदेव, नीता नामदेव, आरती ठाकुर, डॉ. कृतिका रत्नाकर, राजीव लोधी, अरुण उपाध्याय, कीर्ति ठाकुर, मनीता राजपूत आदि उपिस्थत थे।
Published on:
06 Mar 2026 11:42 am
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