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कामना का सकारात्मक रूप धर्म और नकारात्मक रूप अधर्म, योग सात्विक बनाता है इसे अपनाए : स्वामी निरंजनानंद

संभागायुक्त आनंद शर्मा योग निकेतन पहुंचे और स्वामी निरंजनानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर योग पर केंद्रित चर्चा की।

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कामना का सकारात्मक रूप धर्म और नकारात्मक रूप अधर्म, योग सात्विक बनाता है इसे अपनाए : स्वामी निरंजनानंद

कामना का सकारात्मक रूप धर्म और नकारात्मक रूप अधर्म, योग सात्विक बनाता है इसे अपनाए : स्वामी निरंजनानंद

सागर. मानव जगत में कामना की प्रधानता है, यही हमारे उद्धार और पतन का कारण है। सकारात्मक कामना धर्म और नकारात्मक कामना अधर्म है। कामनाओं का शरीर पर व्यापक असर पड़ता है, जो कई बीमारियों तक पहुंचता है। हमें सात्विक कामनाओं के लिए योग विज्ञान को अपनाना चाहिए। यह बात पद्मभूषण स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने योग निकेतन योग प्रशिक्षण संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोह के दूसरे दिन शाम को सत्संग समारोह में कही। इस मौके पर पुलिस अधीक्षक अमित सांघी, महापौर अभय दरे, डॉ.अनिल तिवारी, सुनील जैन, सुखनंदन जैन ने आशीर्वाद लिया। स्वामी ने स्मृति चिन्ह भेंट किया। इसके पूर्व सोमवार की सुबह संभागायुक्त आनंद शर्मा योग निकेतन पहुंचे और स्वामी निरंजनानंद सरस्वती से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर योग पर केंद्रित चर्चा की।

निरंजनानंद सरस्वती ने बताया कि बिहार योग विधालय में योग की विभिन्न अंगों पर केंद्रित शिक्षा दी जाती है। यही पद्धति जीवन शैली को सुधरती है। उन्होंने कहा कि पूजा पाठ, मंदिरों में घंटी बजाने से धार्मिक नहीं बना जाता है। जब तक मन में वैचारिक और कार्यो में शुद्धता नहीं आएगी, तब तक सब बेकार है, तामसिक से सात्विक बनना ही योग है। इस मौके पर योगाचार्य विष्णु आर्य ने कहा कि संयमित जीवन शैली ही हमारे समाज को बेहतर बनाएगी। इसके लिए सम्पूर्ण योग को अपनाना होगा। सत्संग कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी हुई। आयोजन में शामिल होने शहर के अलावा योग से जुड़े दूसरे जिलों के सैकड़ों लोग भी सागर पहुंचे हैं।

गल्र्स डिग्री कॉलेज में छात्राओं को सिखाए योग के गुर

गल्र्स डिग्री कॉलेज में सोमवार को प्राचार्य डॉ. एके पटैरिया के निर्देशन में 'युवा और योगÓ विषय पर एनएसएस व व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मभूषण स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने अपने उद्बोधन में गुरू शिष्य परम्परा के बारे में बताया कि किस प्रकार उनके गुरू ने सेवा परम्परा प्रारम्भ कर 1950 के दशक से योग का प्रचार-प्रसार शुरू किया। उन्होंने कहा कि आज लोग जो मीडिया के माध्यम से योग के विषय में जानते है, उन्हें केवल आसनों की जानकारी है। वास्तव में योग व्यापक क्रिया है, जिसमें ध्यान, व्यायाम आसन सभी का समीश्रण है।

उन्होंने छात्राओं को नियमित सूर्य नमस्कार व प्राणायाम करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि नियमित योग से सकारात्मक ऊर्जा, प्रेरणाशक्ति का विकास तथा शारीरिक क्षमता का उत्तोस्तर विकास होता है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक, रचनात्मक अभिव्यक्ति संस्कृति है जो जीवन के व्यवहार संतुलित करती है। योग गुरू विष्णु आर्य ने स्वामी जी का जीवन परिचय देते हुए योग का महत्व बताया। स्वामी गोरखनाथ ने छात्राओं को भ्रामरि प्राणायाम करते हुए उससे होने वाले लाभ के बारे में समझाया।

आयोजन प्रभारी डॉ. भावना यादव ने संचालन करते हुए कहा कि अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य को महत्व देते हुए हमारे ऋषि-मुनियों ने जीवनचर्या से जुड़े ऐसे नियम, संयम निर्धारित किए जो स्वास्थ्य की दृष्टि से विशेष लाभकारी थे। साथ ही अच्छे स्वास्थ्य का, न ही व्यक्तित्व जीवन में महत्व होता है बल्कि मजबूत राष्ट्र के लिए स्वस्थ नागरिकों की आवश्यकता होती है। स्वस्थ युवा ही सकारात्मक ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण अपनी प्रभावशाली भूमिका का निर्वाह करते हैं। वरिष्ठ प्राध्यापक, व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. इला तिवारी ने कहा कि स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मन रहता है, जिसमें उच्च सकारात्मक विचार आते हैं। इसके लिए योग माध्यम है जिसे युवा छात्राओं को अपनाना चाहिए।

खेल अधिकारी डॉ. मोनिका हर्डिकर ने आभार देते हुए महाविद्यालय में संचालित योग कक्षाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ. संजय खरे, डॉ. प्रतिमा खरे, मंगला सूद, डॉ. अंशु सोनी, स्वामी योग रक्षित, स्वामी भक्तिमूर्ति, स्वामी सत्यमूर्ति, स्वामी ध्यानेरवर, रामनारायण यादव अध्यक्ष योग निकेतन संस्थान, सुनीता श्रीवास्तव, अक्षय दुबे सहित बड़ी संख्या में गल्र्स डिग्री कॉलेज की छात्राएं उपस्थित रहीं।