
सागर.जैन समाज का सबसे पावन पर्युषण पर्व 4 सितंबर से शुरू हो रहा है। जैनियों की श्वेताम्बर शाखा के अनुयायी ११ सितंबर शनिवार तक यह पर्व मनाएंगे। वहीं दिगम्बर समुदाय के जैन धर्मावलंबी 11 सितंबर से 10 दिनों तक इस पावन व्रत का पालन करेंगे। पर्युषण पर्व को लेकर पहले ही जिनालयों, मंदिरों और अन्य आराधना स्थलों की साफ-सफाई कराई जा रही है। पर्युषण पर्व को जैन समाज में सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, इसलिए इसे पर्वाधिराज भी कहते हैं। भादो माह में मनाए जाने वाले इस पर्व के दौरान धर्मावलंबी जैन धर्म के पांच सिद्धांतों- अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक धन जमा न करना) व्रत का पालन करते हैं।
पर्युषण का सामान्य अर्थ है मन के सभी विकारों का शमन करना। यानी अपने मन में उठने वाले हर तरह के बुरे विचार को इस पर्व के दौरान समाप्त करने का व्रत ही पर्युषण महापर्व है। जैन धर्मावलंबी इस पर्व के दौरान मन के सभी विकारों- क्रोध, लोभ, मोह, ईष्र्या और वैमनस्य से मुक्ति पाने का मार्ग तलाश करते हैं।
मदिरों में होंगे कार्यक्रम
पुर्यषण पर्व पर 10 दिनों तक मंदिरों में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। भाग्योदय में मुनिश्री समय सागर महाराज के सानिध्य में कार्यक्रम होंगे। वर्णीभवन मोराजी में मुनि सुप्रभ सागर और मकरोनिया में अनंतमति माताजी के सानिध्य में धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। तपोवन में आचार्य निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में सुबह प्रवचन होंगे और शाम को आरती का आयोजन किया जाएगा।
Published on:
31 Aug 2021 11:11 am
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