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खादी ग्राम उद्योग की शुद्ध खादी आ रही लोगों को पसंद, हाथ से होती है तैयार

सर्वोदय प्रचारक संघ 26 वर्षों से करता आ रहा है संचालन, महिलाओं को मिलता है रोजगार

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People are liking the pure Khadi of Khadi Village Industry, it is prepared by hand.

खादी ग्राम उद्योग में तैयार की गई खादी

बीना. भले ही आज कई वैरायटी के कपड़े बाजार में आ गए हों, लेकिन खादी की एक अलग पहचान है। आज भी लोग खादी को पसंद करते हैं, जो हर मौसम में सुकून देती है। शहर में भी 26 वर्षों से खादी ग्राम उद्योग चल रहा है।
सर्वोदय प्रचारक संघ वर्ष 1998 से खादी ग्राम उद्योग चला रहा है और चरखा से सूत कातकर खादी तैयार की जाती है। मशीनों की जगह पूरा कार्य हाथों से होता है और शुद्ध खादी बनती है। इसका विक्रय सर्वोदय भवन से ही होता है। पंद्रह अगस्त के त्योहार पर अधिकांश लोग खादी के कपड़े ही पहनते हैं। सूत कातने से लेकर कपड़ा तैयार करने तक का कार्य बिना मशीनों के होता है।

मशीनों से नहीं बनती शुद्ध खादी
खादी ग्राम उद्योग का संचालन कर रहे जशरथ लोधी ने बताया कि मशीन से शुद्ध खादी नहीं बनती है। प्राकृतिक रेसा से तैयार किए गए धागा से, जो कपड़ा बनता है वह शुद्ध खादी है, जो उपयोग करने पर सुकून मिलता है। आज भी लोग हाथ से बनी शुद्ध खादी को पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से चरखा नहीं चल पा रहे हैं, लेकिन खादी का स्टाक रखा हुआ है और जल्द ही फिर से चरखा से सूत कातकर नई खादी बनाना शुरू की जाएगी।

अन्य शहरों में भेजी जाती थी खादी
खादी ग्राम उद्योग बीना से बनी खादी इंदौर, भोपाल, छतरपुर, उज्जैन सहित उप्र, राजस्थान भी जाती थी। साथ ही एक बार लंदन तक यहां की खादी भेजी जा चुकी है, जो वहां के लोगों को बहुत पसंद आई थी। संचालक ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा लोग खादी का उपयोग करें इसका प्रयास भी किया जा रहा है।