सुबह-शाम कथा का श्रवण दिपांशु नागदेव ने बताया कि 40 दिनों में समाज के लोगों का धर्म के प्रति विशेष रुझान बढ़ता है। केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा भी धर्म में लीन रहते हैं।
सिंधी कॉलोनी स्थित झूलेलाल मंदिर में पिछले 72 वर्षों अखंड ज्योति जल रही है। पाकिस्तान के सिंध से गोविंदराम मनवानी, गोवर्धनदास भोपाली, हरपालदास नानवानी, लक्ष्मण दास राजपूत, माधव लाल हसरेजा आदि ने भगवान झूलेलाल की यह ज्योत जलाकर लाई थी। जो आज भी मंदिर में प्रज्वलित हो रही है। यहां बुधवार से मंदिर के बाजू वाले हाल में भगवान झूलेलाल चालीहा बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। जो भी महिला या पुरुष 40 दिनों तक व्रत एवं पूजा अर्चना करते हैं, उन्हें अखंड ज्योति के दर्शन करना अनिवार्य है। महोत्सव का यह 25 वां साल है। पहली बार इस साल बुधवार को 108 महिलाओं द्वारा चालीहा ज्योत प्रज्वलित की जाएगी। महिला शक्ति को बढ़ावा देने के लिए यह नया प्रयोग किया जा रहा है। सिंधी समाज की महिलाएं शक्ति का प्रतीक लाल रंग साड़ी पहनकर ज्योत जलाएंगी। मंगलवार को महिलाओं ने इसकी तैयारी कर ली है।
जय माता दी झूलेलाल शरण मंडली के संस्थापक लालाराम मेठवानी ने बताया कि अब तक किसी साधु-संत से ज्योत जलवाते थे, लेकिन इस बार नया प्रयोग कर रहे हैं। महिलाएं ज्योत जलाएंगीं। पिछले 25 वर्षों में यह पहली बार हो रहा है। महोत्सव में 27 जुलाई को झूलेलाल मूर्ति सजाओ प्रतियोगिता होगी। 4 अगस्त को फूलों की वर्षा, 10 अगस्त को आरती की थाली सजाओ प्रतियोगिता, 16 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव एवं श्रीकृष्णा वेशभूषा प्रतियोगिता होगी। 17 अगस्त को छप्पन भोग लगेंगे। 24 अगस्त को चालीसा व्रतधारियों का हवन-पूजन, 25 अगस्त को झूलेलाल चालीसा अखंड ज्योति का नगर भ्रमण एवं विसर्जन होगा। शाम को महाप्रसादी वितरण कार्यक्रम होगा।
सिंधी महिला मंडल की अध्यक्ष दिया राजपूत ने बताया कि पहली बार महिलाएं ज्योत जलाएंगी। समाज की बड़ी संख्या में महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। सभी महिलाएं लाल रंग की साड़ी पहनेंगी। उन्होंने बताया कि भगवान झूलेलाल इन दिनों वरुणदेव का अवतरण करते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इन 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। हर शुक्रवार को भगवान का अभिषेक किया जाता है।
सुबह-शाम कथा का श्रवण दिपांशु नागदेव ने बताया कि 40 दिनों में समाज के लोगों का धर्म के प्रति विशेष रुझान बढ़ता है। केवल बुजुर्ग ही नहीं बल्कि युवा भी धर्म में लीन रहते हैं। महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के लिए इस वर्ष महिलाएं ज्योत जला रही हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर भी प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इस दौरान समाज के लोग व्रत-उपवास रखते हैं. सुबह शाम झूलेलाल भगवान की कथा सुनते हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की पूजा करता है, उसके सभी कष्ट दूर होते हैं।