
Rajghat Phase-2 project stuck with the government
सागर. पानी के गंभीर संकट से जूझने वाले सागर शहर के लिए गुरुवार को अच्छी खबर आई। सागर की लाइफलाइन राजघाट बांध की ऊंचाई को दो मीटर बढ़ाने का फैसला लिया गया। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने इस पर होने वाले 100 करोड़ के खर्च की मंजूरी दे दी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि प्रशासन चाहे इस पर कल से काम लगा दे। दरअसल राजघाट बांध चाहे भले मानसूनी नदी बेबस पर बना हो, लेकिन पहाड़ों से पानी आने के कारण इसका कैचमेंट एरिया बहुत बड़ा है और स्टोरेज क्षमता भी अत्यधिक है। हर साल बांध की कम ऊंचाई की वजह से बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता था। अब इसकी ऊंचाई दो मीटर बढ़ाए जाने से बांध की स्टोरेज क्षमता में 27 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो जाएगी। यानी की सागर शहर को एक चौथाई अतिरिक्त पानी मिल सकेगा।
अभी बांध की ऊंचाई 515 मीटर है। इसे 517 पर ले जाने का प्रस्ताव है। इससे बिना अतिरिक्त क्षेत्र डुबाए जल भराव को 62.67 एमसीएम से बढ़ाकर 80 एमसीएम तक पहुंचा सकेंगे। इसका फायदा सागर शहर के अलावा मकरोनिया, केंट सहित दूसरे उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों को मिलेगा। संकट से छुटकारा मिलेगा।
आधा शहर प्यासा
सागर शहर के कई इलाके ब्लैक जोन में आते हैं। जहां का भूमिगत जलस्तर ठंड के दिनों में ही इतना नीचे चला जाता है कि बोर जवाब दे जाते हैं। ऊपर से राजघाट की कम क्षमता की वजह से आधा शहर प्यासा रह जाता है। आलम यह है कि गर्मी के दिनों में तीसरे या चौथे दिन पानी की सप्लाइ होती है। अब एक चौथाई स्टोरेज बढऩे से तीन महीने का अतिरिक्त पानी मिल सकेगा। इससे गर्मी के दिनों में भी शहर की वाटर सप्लाइ सामान्य बनी रहेगी। ज्ञात हो कि छावनी क्षेत्र के लिए भी पानी की सप्लाइ यहीं से होती है।
एक्सपर्ट-व्यू
मुख्य सचिव द्वारा लिया गया यह निर्णय सागर के लिए एक बहुत ही बड़ा फैसला है। राजघाट फेस-2 के तहत बांध की ऊंचाई लगभग 2 मीटर बढ़ाई जानी थी, लेकिन 24 घंटे सातों दिन वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट में किसी कारण बस इसको शामिल नहीं किया गया। बांध की ऊंचाई बढ़ाए बिना शहर में 24 घंटे सातों दिन वाटर सप्लाई करना असंभव है। शायद यही वजह है कि मुख्य सचिव ने इस तकनीकी फाल्ट को समझ कर शहर के लिए यह निर्णय लिया है। वर्तमान में देखने को मिल रहा है कि दो या तीन दिनअच्छी बारिश होने के बाद राजघाट लबालब हो जाता है और फिर बरसात के सीजन में बांध लगातार ओवरफ्लो होता है। दूसरे शब्दों में यह कहे कि बारिश का पानी 2 महीने बर्बाद होता रहता है। बांध की ऊंचाई बढ़ाने से आशय यह है कि उसके स्पिल-वे में गेट लगा दिए जाएं जिससे बांध की जल भराव क्षमता बढ़ जाएगी।
इंजीनियर प्रकाश चौबे
Updated on:
30 Aug 2019 12:54 pm
Published on:
30 Aug 2019 12:53 pm
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