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राजघाट नहीं करेगा निराश पर अवैध नल कनेक्शन करवा सकते हैं त्राहि-त्राहि

पिछले वर्ष और इस बार का जलस्तर लगभग समान, बांध में हो रही पानीचोरी को भी देखा

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Rajghat Invalid tap connection water crisis municipal Corporation

Rajghat Invalid tap connection water crisis municipal Corporation

सागर. राजघाट बांध में पिछले वर्ष ३१ मार्च की स्थिति में जो जलस्तर नापा गया था, इस बार भी उतना ही जलस्तर रिकार्ड किया गया है। महापौर अभय दरे ने टीम के साथ शनिवार की सुबह राजघाट बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने खुद ही बांध का जलस्तर नापा, जो लगभग ५१० मीटर मिला। दरे के मुताबिक पिछले वर्ष भी बांध में जलस्तर लगभग इतने ही मीटर पर था। पिछले वर्ष शहरवासियों को पानी के नाम पर कोई परेशानी नहीं आई थी, इसलिए इस बार भी एेसी ही उम्मीद है कि राजघाट बांध से मानसून आने तक जलापूर्ति होती रहेगी।


वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बजट में प्रावधान
दरे का कहना है कि निगम में किराये पर टैंकर लगाने पर आरोप-प्रत्यारोप का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस बार बजट में दो वार्डों के बीच एक टैंकर उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही लगभग ८ नए ट्रैक्टर भी खरीद रहे हैं ताकि प्राइवेट लोगों पर निगम की निर्भरता समाप्त हो जाए। इसके अलावा यदि जरूरत पड़ी तो जिला प्रशासन के सहयोग पर वार्डों में टयूब-वेल खनन का कार्य भी करवाएंगे।
पत्रिका व्यू
निगम के जिम्मेदारों ने जल संरक्षण को लेकर अब तक कोई उल्लेखनीय प्रयास नहीं किए हैं। राजघाट में पानी की चोरी, शहर में पेयजल पाइपलाइनों में लीकेज, अनावश्यक रूप से दो-दो घंटे की जलापूर्ति, अवैध नल कनेक्शन जैसे मामलों में कोई खास प्रयास नहीं हुए हैं। जरूरत होगी कि निगम प्रशासन द्वारा ३ अप्रैल से शुरू किए जा रहे जल संरक्षण अभियान में इन बिंदुओं के तहत स्थाई प्रयास किए जाएं, ताकि पानी के नाम पर शहर में कभी भी कोई समस्या न आए।

इधर, अवैध नल कनेक्शन बिगाड़
रहे पेयजल सप्लाई का गणित
सागर. शहर समेत पूरा जिला करीब चार महीने पहले सूखाग्रस्त घोषित हो चुका है, इसके बाद भी राजघाट बांध के पानी प्रबंधन पर नगर निगम ने अब तक कोई प्रयास शुरू नहीं किया है। अवैध नल कनेक्शनों पर कार्रवाई के नाम पर निगम ने पिछले १० महीनों में एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं की है। वैध नल कनेक्शन की तुलना में अवैध नल कनेक्शन की संख्या तीन गुना ज्यादा है।
निगम परिषद की बैठकों में एक-दो बार नहीं बल्कि १० बार से ज्यादा अवैध कनेक्शनों पर चर्चा हो चुकी है। इन्हें वैध करने के लिए उपभोक्ताओं को राहत देने की भी बात कही गई थी। इतना ही करीब १० साल पहले अवैध को वैध करने का हवाला देकर ही पानी पर आरक्षण भी लाद दिया गया लेकिन संख्या कम होने की बजाय और ज्यादा बढ़ गई है।

जिन्हें मुफ्त में कनेक्शन दिए वहां ज्यादा अव्यवस्था
दलित बाहुल्य बस्तियों में निगम मुफ्त में पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। वर्तमान में नरयावली विधायक व तत्कालीन महापौर प्रदीप लारिया के कार्यकाल में यह निर्णय हुआ था, जिसमें हवाला दिया गया था कि इससे अवैध नल कनेक्शनों की संख्या में कमी आएगी। निगम के ४८ वार्डों में ७० हजार से ज्यादा तो मकरोनिया में करीब १५ हजार से ज्यादा अवैध नल कनेक्शन हैं।
अतिक्रमण की तरह करनी होगी कार्रवाई
निगम प्रशासन जैसी कार्रवाई अतिक्रमण हटाने के लिए कर रहा है वैसी ही कार्रवाई अवैध नल कनेक्शनों के विरुद्ध करनी होगी। निगम के जिम्मेदार इस मामले में भी पुलिस का सहयोग ले सकते हैं। परिषद व अफसरों की अलग-अलग बैठकों में उपभोक्ताओं को डराने के लिए ही सिर्फ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही गई लेकिन आज तक एेसी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


ऐसे समझें कहां जा रहा आपके हिस्से का पानी
शहर में एेसे दर्जनों स्थान हैं, जो व्यवसायिक श्रेणी में आते हैं लेकिन उनके यहां निगमकर्मियों की मिलीभगत से
घरेलू कनेक्शन दिए गए हैं।
कई घरों में आधा इंच के कनेक्शन की जगह
एक इंच की लाइन बिछा दी गई है।
ओएचटी को भरने वाली फीडर लाइन तक में
कई स्थानों पर कनेक्शन हैं।
डायरेक्ट सप्लाई वाले वार्डों में सिविल लाइन
जैसे स्थानों पर नलों से चौबीस घंटे पानी निकलता रहता है।