
raksha bandhan Siblings love sacrificing dedication
सागर. रविवार को रक्षा बंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। भाइयों ने भी बहनों को उनकी रक्षा का वचन दिया। इस बार रक्षा बंधन पर भद्राकाल नहीं होने से दिनभर राखी बंधी। हालांकि शाम 4.30 बजे से शाम 6 बजे तक राहुकाल रहने से बहनों ने इस समय राखी नहीं बांधी।
रविवार को मंदिरों में भी भीड़-भाड़ रही। पं. शिवप्रसाद तिवारी ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के एक अवतार हयग्रीव का भी जन्मदिन रहता है। इसलिए राखी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विशेष शुभ फलदायी है। भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार के पीछे देवी लक्ष्मी का भी योगदान था, इसलिए भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करना धन और समृद्धिदायक रहता है। रक्षा बंधन के दिन बारिश थमी रहने से बाजार में भी भीड़ नजर आई। सुबह से बाजार में बहनें राखी खरीदने के लिए पहुंची तो भाइयों ने तोहफे खरीदे। ड्राय फ्रूट और मिठाई की भी खरीदी हुई।
जैन मंदिरों में बंधी राखी
जैन धर्म में रक्षाबंधन का विशेष महत्व है। 700 मुनिराजों पर आए उपसर्ग निवारण का यह पर्व है। विष्णु कुमार मुनिराज ने 700 मुनिराजों की रक्षा के लिए विक्रिया रूप धारण किया था। इसलिए रविवार को जैन मंदिरों में रक्षा सूत्र बांधकर यह पर्व मनाया गया। मंदिर की राखी बांधने के बाद भाई-बहनों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी।
केंद्रीय जेल में रही सुरक्षा चौकस
राखी के त्योहार पर केंद्रीय जेल में इस बार भी बहनें अपने भाइयों को राखी नहीं बांध पाईं। जेल मुख्यालय द्वारा तय किए गए कड़े सुरक्षा मानदंडों के चलते राखी, मिठाई और फल जांच के बाद बंदियों तक पहुंचाए गए। रविवार को केंद्रीय जेल आने वाले परिजनों को रुकने-बैठने के इंतजाम गए थे।
केंद्रीय जेल में रविवार को सुबह ८ बजे से शाम ५.३० बजे के बीच ८३३ सजायाफ्ता-विचाराधीन बंदियों से उनके परिजनों की मुलाकात कराई गई पर भाइ की कलाई पर राखी न बांध पाने से बहनें निराश ही रह गईं।
त्योहार पर परिजनों से बंदियों की मुलाकात को करीब दो साल पहले भोपाल केंद्रीय जेल से सिमी आतंकियों के भागने के बाद बहुत सीमित कर दिया है। पहले जहां केंद्रीय जेल परिसर में बंदियों को उनके परिजनों के साथ आमने-सामने मुलाकात करने का मौका दिया जाता था उस पर जेल मुख्यालय द्वारा रोक लगा दी गई है। अब परिजन केवल मुलाकात कक्ष में सीखचों के पीछे से बंदियों से मिलकर बात कर सकते हैं।
-राखी बांधने-मिठाई खिलाने पर पाबंदी :-
रक्षाबंधन पर जेल मुख्यालय की पाबंदी का असर केंद्रीय जेल परिसर मंे भाइयों को राखी बांधने पहुंची सैंकड़ों बहनों के चेहरे पर साफ दिखा। सलाखों के बीच बंद अपने भाइयों से बात करते-करते कई बहनें सिसक उठीं। उन्हें त्यौहार पर अपने भाई से मिलकर उन्हें राखी न बांध पाने और मिठाई से मुंह मीठा न कराने का अफसोस रहा। केंद्रीय जेल उपाधीक्षक मदन कमलेश के अनुसार रविवार को सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक और डेढ़ घंटे के अवकाश के बाद शाम 4.30 से 5.30 बजे के बीच कंेद्रीय जेल के 833 बंदियों की मुलाकात कराई गई। जबकि करीब इतने ही बंदियों से मिलने उनके परिजन जेल नहीं पहुंचे।
Published on:
27 Aug 2018 10:54 am
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