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पूर्णिमा पर भगवान का श्वेत वस्त्रों से होगा शृंगार, भगवान को लगेगा दूध का भोग
सागर. शरद पूर्णिमा साल भर की सभी पूर्णिमा तिथियों में सर्वाधिक शुभ और महत्वपूर्ण मानी जाती है। धन प्राप्ति और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए यह दिन बहुत खास है। इस बार शरद पूर्णिमा या कोजागरी पूर्णिमा 16 और 17 तारीख की मध्य रात्रि में आ रही है। मध्य रात्रि में चंद्रमा की कला अपने उच्च अंश पर होती है। इस दिन चंद्रमा की पूर्ण ऊर्जा वनस्पति पर पड़ती है। यह वनस्पति और फसलें अमृत के रूप में प्राप्त होती है। इस बार की शरद पूर्णिमा रवि योग में आ रही है। इस पूर्णिमा के मध्य रात्रि साधना उपासना के मान से श्रेष्ठ मानी जाती है।पूर्णिमा पर हुआ था महारासधर्म शास्त्रीय एवं पौराणिक अभिमत के अनुसार देखें तो कालरात्रि, मोहरात्रि, सिद्ध रात्रि और दारुण रात्रि बताई जाती है। शरद पूर्णिमा की रात्रि को महारास हुआ था, ऐसा भागवत में उल्लेख है। इस महारास में कृष्ण के साथ गोपियों का रास बताया गया है। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव ने अपनी उपस्थिति प्रस्तुत की थी। इस दृष्टि से इस रात्रि में आराधना विशेष मानी जाती है। शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक कृष्ण अमावस्या तक माता महालक्ष्मी की 15 दिन की साधना है, लेकिन कुछ लोग कार्तिक मास के पांच दिवस की साधना करते हैं। शरद पूर्णिमा से कार्तिक कृष्ण अमावस्या तक महाकाली, महालक्ष्मी और मां सरस्वती की साधना का वर्णन है।
मंदिरों में होंगे आयोजन
-बड़ा बाजार स्थित देवराघवजी मंदिर में बुधवार को सुबह राघवजी सरकार का पंचामृत अभिषेक होगा। श्वेत वस्त्र धारण कराकर चांदी के आभूषणों व फूलों से पूर्णिमा का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। दोपहर 12 बजे राजभोग आरती में खीर का भोग लगाकर भक्तों को प्रसादी के रूप में वितरण होगा। दोपहर 1 बजे से कथा सुनाई जाएगी। महिला भक्त ठाकुरजी को खोबा के लड्डुओं का भोग लगाएंगी।
- द्वारकाधीश मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव मनाया गया। मंदिर की उत्सव समिति के शिवम सोनी ने बताया कि बुधवार को सुबह मंगला आरती के बाद ठाकुरजी का अभिषेक पूजन हुआ। दोपहर में सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाई गई। ठाकुरजी सफेद पोशाक धारण कर गर्भगृह से बाहर आएंगे। भगवान द्वारिकाधीश को केसर युक्त दूध का भोग लगाकर आरती के बाद भक्तों को वितरित किया जाएगा।
- काकागंज स्थित हनुमान मंदिर में बुधवार को भगवान राम जानकी का सुबह नित्य पूजन होगा। दोपहर 12 बजे राजभोग आरती में खोबा के लड्डू का भोग लगेगा। दोपहर में भगवान सत्यनारायण भगवान की कथा सुनाई जाएगी। शाम को भगवान को दूध का भोग लगाकर प्रसादी के रुप में वितरण होगा।
Published on:
16 Oct 2024 12:23 pm
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