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गौर जयंती की पूर्व संध्या पर साहित्यिक संस्थाओं ने एेसे दी सर को पुष्पांजलि

डॉ साहब की यादें संजोने का काम हम सबका है

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Sagar Dr. Sir Harisingh Gaur's birth anniversary

Sagar Dr. Sir Harisingh Gaur's birth anniversary

सागर। सागर के श्रद्धापुरुष,दानवीर, साहित्यकार, विधिवेत्ता,राजनीतिज्ञ और सागर विश्व विद्यालय के संस्थापक डॉ. सर हरीसिंह गौर के 149 वे जन्म जयंती पर्व की पूर्व संध्या पर श्यामलम्,जे.जे. फाउंडेशन, स्वर संगम और सागर पाठक मंच आदि संस्थाओं द्वारा सिविल लाइन में पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें स्मृत किया।
इस अवसर पर प्रो.सुरेश आचार्य ने गौर साहब के कृतित्व व व्यक्तित्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि सागर में विश्वविद्यालय नहीं होता तो हम सब आज जिन स्थानों पर पदस्थ और कार्यरत हैं वह सम्भव नहीं होता।उन्होंने डॉ. गौर की जन्मस्थली बंगला स्कूल के जीर्णोद्धार कर भव्य लाइट हाउस बनाकर विकसित करने और गौर बब्बा की स्मृति को अक्षुण्ण बनाये रखने में पूर्व कुलपतियों स्व.शिवकुमार श्रीवास्तव,प्रो.डी. पी.सिंह और वर्तमान कुलपति डॉ. आर.पी.तिवारी के योगदान को उल्लेखित करते हुए उनकी सराहना की।उन्होंने कहा कि सागर विश्व विद्यालय से पढ़कर निकले हजारों छात्र देश-विदेश में हैं उन्हें गौर जयंती मनाये जाने के लिए प्रेरित किया जाने की जरूरत है।
रीवा और बरकतउल्ला विश्व विद्यालय के कुलपति रहे प्रो.उदय जैन ने इस अवसर पर सागर विश्वविद्यालय की स्थापना,अपने विद्यार्थी जीवन तथा डॉ. गौर से जुड़े कई रोचक संस्मरण सुनाकर श्रोताओं को रोमांचित कर दिया।उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि डॉ. गौर की जन्म जयंती पूरे प्रदेश और देश में मनाई जानी चाहिए।
कवयित्री व लेखिका डॉ. चंचला दवे ने डॉ. गौर के अवदान पर आधारित मधुर कविता का पाठ कर प्रभावित किया।
वरिष्ठ पत्रकार शैलेष बनासा ने कहा कि वे राजस्थान निवासी हैं ।अपनी युवावस्था से सागर और सागर विश्व विद्यालय का नाम सुन रखा था जिससे सागर आने की बहुत उत्सुकता होती थी।
डॉ. अमर कुमार जैन ने भी गौर साहब से जुड़ी कुछ प्रमुख घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्हें सागर का श्रद्धापुरुष कहा।
संचालन उमा कान्त मिश्र श्यामलम् ने तथा आभार प्रदर्शन हरीसिंह ठाकुर स्वर संगम ने किया।इस अ वसर पर बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।