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सब धर्मों का सार, प्रेम ही है जीवन आधार

सत्य साई सेवा संगठन ने महिला दिवस की सर्वधर्म संगोष्ठी

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Satya Sai Seva Sangathan Women's Day Sadhsharma Seminar

Satya Sai Seva Sangathan Women's Day Sadhsharma Seminar

सागर. श्री सत्य साई सेवा समिति सागर ने बुधवार को सिविल लाइन स्थित साई निलयम में 'जीवन शैली एवं आध्यात्म' विषय पर सर्वधर्म संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं जैन धर्म की अनुयायी महिला वक्ताओं ने अपने धर्म पर केंद्रित मानव मूल्य एवं आध्यात्म पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। अनिता जैन ने कहा कि जैन धर्म में महावीर स्वामी ने कहा है कि इन्द्रियों को जीतने वाला ही जैन है। ईसाई धर्म की अनुयायी डॉ. अलका पुष्प निशा ने कहा कि बाइबल में सभी से निस्वार्थ प्रेम पर जोर दिया गया है। अमृत कौर एवं सिमरन कौर ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी ने मनुष्य की जाति एक बताई है और मनुष्य के तीन कार्य बताये हैं. नाम जपना, कार्य ईमानदारी से करना तथा मिल बांट कर खाना। आपने 'तुम करो दया मेरे साईÓ शबद सुनाया। इस्लाम धर्म की अनुयायी बेगम निशात अफरोज ने कहा कि इस्लाम धर्म भी आपसी भाईचारा एवं प्रेम का संदेश देता है। बुराई को भी प्यार से जीता जा सकता है। हम पांच समय की नमाज अता करते समय सीधे अल्लाहताला से संपर्क करते हैं। महिला संगोष्ठी का संचालन कर रहीं प्रीति चतुर्वेदी ने हिन्दू धर्म की वैदिक परम्पराओं का उल्लेख करते हुए चार वर्ण व्यवस्था, चार आश्रम तथा सोलह संस्कारों को अध्यात्म से जोड़ते हुए विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सत्य साई बाबा ने सर्व धर्म समभाव, सबसे प्रेम सबकी सेवा का संदेश सदैव दिया है। इस अवसर पर समिति सदस्य रानी दुबे, कीर्ति दुबे, विधाता, डॉ देवेंद्र मुखारया, डॉ प्रेम चतुर्वेदी, श्रीराम दुबे,अभय जैन, संजीव सुहाने एवं अनमोल दुबे उपस्थित थे। आशा पिम्पलापुरे ने सभी धर्म के अनुयायी वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।