
पार्षद पति बजा रहा था साउंड बॉक्स
सागर. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन कर धार्मिक आस्था और सामाजिक-निजी आयोजनों के नाम पर हो रहे ध्वनि प्रदूषण पर कसावट के लिए पुलिस-प्रशासन ने तैयारी कर है। परीक्षाओं का सीजन आने के साथ ही पुलिस-प्रशासन ने हाल ही में शहर के 40 से ज्यादा मैरिज गार्डन संचालकों को इसकी सूचना के साथ कार्रवाई की हिदायत भी दी है।
सुप्रीेम कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर जारी गाइड लाइन में सामान्य तौर पर रात १० बजे से सुबह ६ बजे के बीच लाउड स्पीकर बजाने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ ही लाउड स्पीकर के उपयोग के लिए भी ध्वनि का लेवल तय किया है। इससे अधिक डेसीवल पर लाउड स्पीकर, डीजे साउंड का उपयोग नहीं किया जा सका। लेकिन प्रशासन की अनदेखी और लाउडस्पीकर के शोर पर सख्त रवैया न अपनाने से देर रात में भी लाउडस्पीकर-डीजे का शोर गूंजता है।
छात्र-वृद्धों की मुसीबत
शहर में वायु प्रदूषण का लेवल तो बढ़ ही रहा है, ध्वनि के मामले में भी राहत की स्थिति नहीं है। सुबह-शाम धर्मस्थलों पर लगे लाउड स्पीकर और डीजे का शोर सबसे ज्यादा परीक्षाओं की तैयारी में जुटे बच्चों और ब्लड प्रेशर व हृदयरोगियों को सता रहा है। वृद्धजनों में लगातार कानफोडू शोर के कारण तनाव बढ़ जाता है। ध्वनि प्रदूषण बढऩे के कारण शहर के कई क्षेत्रों के रहवासियों में हाईपर टेंशन, ब्लड प्रेशर, सिरदर्द बढऩे और श्रवणशक्ति प्रभावित होने के मामले सामने आ रहे हैं।
नाम की कार्रवाई
ननि और नपा क्षेत्र सहित सदर-कैंट में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ी है। शहर में ४० से ज्यादा डीजे-साउंड सिस्टम से जुड़े प्रतिष्ठान हैं। अकेले शादी समारोहों में शहर व उपनगरीय क्षेत्र में ४० से ५० चलित व प्लेटफार्म डीजे उपयोग किए जाते हैं। इस दौरान शाम ७ बजे से रात ११ बजे के बीच ध्वनि प्रदूषण १५० डेसिबल से ऊपर पहुंच जाता है। जबकि इसे औसत ८० डेसिबल के आसपास होना चाहिए। लेकिन खुली सड़क निकल रही बारातों में शोर मचाते डीजे देखने के बाद भी कार्रवाई नहीं की जाती।
प्रशासनिक लापरवाही के चलते सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट ने एक शिकायत पर सख्त रवैया दिखाया है। कोर्ट ने शंक्वाकार लाउड स्पीकार प्रतिबंधित करने के अलावा धर्मस्थलों से हो रहे शोर पर भी अंकुश लगाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने तमिलनाडू राज्य के पब्लिक सेक्रेटरी को ध्वनि प्रदूषण रोकने के आदेश के साथ कठोर टिप्पणी भी की है। जिसमें कहा है 'भक्तों की प्रार्थना सुनने के लिए किसी भी धर्म के आराध्य को लाउड स्पीकार की जरूरत नहीं है क्योंकि उसे हर जगह व्याप्त होने की मान्यता है।
Published on:
08 Feb 2018 11:51 am
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