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ग्रीष्मकालीन मूंग पर मौसम की मार, तापमान गिरने और आसमान पर बादलों से नहीं बढ़ रही फसल, लग रहे कीट

2800 हेक्टेयर में की गई है बोवनी, 900 हेक्टेयर में की गई है उड़द की बोवनी, फसल प्रभावित होने से किसानों को उठाना पड़ेगा घाटा, क्योंकि ग्रीष्मकालीन फसल में लागत आती है ज्यादा

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Summer mung beans are hit hard by the weather, with temperatures plummeting and clouds blocking crop growth and infesting pests.

मौसम की मार से मूंग फसल रह गई छोटी। फोटो-पत्रिका

बीना. तीसरी फसल के रूप में पिछले कुछ वर्षों से किसान ग्रीष्म कालीन मूंग की बोवनी करने लगे हैं। इस वर्ष भी 2800 हेक्टेयर में बोवनी की गई है, लेकिन मौसम में आए बदलाव का असर फसल पर दिख रहा है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ेगा और किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। पिछले वर्ष मूंग की बोवनी 1820 हेक्टेयर में हुई थी, जो इस वर्ष एक हजार हेक्टेयर ज्यादा है।
पिछले कुछ दिनों से लगातार मौसम में उतार-चढ़ाव आ रहा है। बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि भी हो चुकी है। साथ ही आसमान पर बादल भी छाए हुए हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है। मौसम में आए बदलाव का असर मूंग फसल पर दिखने लगा है, जिससे पौधों का विकास रूक गया है। साथ ही कीटों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। पांच एकड़ में मूंग की बोवनी करने वाले किसान प्रतिपाल सिंह ने बताया कि फसल के पौधे बढ़ नहीं रहे हैं और उगरा जैसा रोग भी लग रहा है। ग्रीष्मकालीन मूंग की सिंचाई के बाद तेज धूप की जरूरत होती है, लेकिन इस वर्ष कभी आसमान पर बादल छा जाते हैं, तो कभी बारिश हो जाती है, जिसका असर फसलों पर पड़ रहा है। चेतन्य अग्रवाल ने बताया कि मूंग फसल 28 दिन की हो चुकी है, लेकिन उसके अनुसार फसल का विकास नहीं हुआ है। पौधों के पत्ते सिकुड़ रहे हैं।

उड़द की बोवनी हुई 900 हेक्टेयर में
इस वर्ष कृषि विभाग की जागरूकता के बाद किसानों उड़द की बोवनी भी की शुरू की है। पिछले वर्ष 45 हेक्टेयर में बोवनी हुई, जो इस वर्ष 900 हेक्टेयर में हुई है और उड़द की फसल मूंग से अच्छी है। किसानों ने मूंगफली की बोवनी 50 और मक्का की 35 हेक्टेयर में बोवनी की है।

तापमान कम होने का है असर
कृषि वैज्ञानिक आशीष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ग्रीष्मकालीन मूंग के लिए नमी के साथ धूप की जरूरत रहती है, लेकिन इस वर्ष तापमान में गिरावट आने से फसल प्रभावित होगी। यदि उगरा या सफेद मच्छर का प्रकोप है, तो एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत या थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत दवा का छिडक़ाव करें। दवा छिडक़ाव के कुछ दिन बाद एनपीके पाउडर के घोल का छिड़काव करें।