
Swarm of deer
बीना. बीना क्षेत्र में बढ़ी संख्या में हिरन हैं। हिरनों के झुंड खेतों में घूमते हैं, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। हिरनों के फसल बर्बाद करने पर किसानों को कोई मुआवजा भी नहीं मिलता है। जिससे किसानों को हर वर्ष नुकसान उठाना पड़ता है।
पहले से ही किसान प्रकृति की मार से परेशान हैं और अब जिन किसानों ने बोवनी कर दी हैं उनकी फसलों को जंगली जानवरों का खतरा बढ़ गया है। यह जंगली जानवर फसलें बर्बाद कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हिरनों की संख्या इतनी ज्यादा है कि किसानों को फसल बचाना भी मुश्किल हो जाता है। हिरनों को कोई नुकसान पहुंचाएं बिना ही खेतों से बाहर निकालना पड़ता है। किसान इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करा चुके हैं, लेकिन इस समस्या का कोई हल नहीं निकल रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि किसानों को नुकसान का मुआवजा भी नहीं दिया जाता है।
बर्बाद हो जाती है फसल
किसान किशनलाल पटेल ने बताया कि जिस जगह से हिरनों का झुंड निकलता है वहां से फसल खराब हो जाती है। पैर पडऩे से फसल जमीन में धस जाती है। एक साथ कई हिरण निकलते हैं।
पानी, भोजन की रहती है तलाश
हिरनों के झुंड जंगलों के कम होने के कारण खेतों में पानी और भोजन की तलाश में आते हैं। खेतों में चलने वाले ट्यूबवेलों से इन्हें पानी मिल जाता है। जिसके चलते कई बार हिरन कुत्तों का शिकार भी हो जाते हैं।
सड़क हादसों का होते हैं शिकार
एक खेत से दूसर खेतों में जाते समय हिरन सड़क हादसें के शिकर भी हो जाते हैं। सबसे ज्यादा हादसा बीना-खिमलासा और बीना-खुरई रोड पर होते हैं। वाहनों की स्पीड तेज होने के कारण चालक हिरन सामने आने पर वाहन कंट्रोल भी नहीं कर पाते हैं। वन विभाग ने सड़कों पन वन्य जीव प्राणी संबंधित कोई बोर्ड भी नहीं लगाए हैं।
Published on:
04 Jan 2018 07:30 am
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