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शहर को व्यवस्थित करने का प्लान सिर्फ कागजों में, जमीनी हकीकत से कोसों दूर

पार्किंग न होने से सड़कों पर खड़े हो रहे वाहन, मनमर्जी से वाहन खड़े कर हो रही लोडिंग-अनलोडिंग, दिन में कई बार लगता है जाम, फिर भी ट्रांसपोर्ट नगर नहीं हो पा रहा विकसित

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The city's planning exists only on paper, far from ground reality.

पार्किंग न होने से आधी सड़क पर खड़े वाहन। फोटो-प​त्रिका

बीना. शहर को व्यवस्थित करने के लिए सभी प्लान सिर्फ कागजों तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। वर्षों पहले तैयार की गई योजनाओं में पार्किंग, ट्रांसपोर्ट नगर और ऑटो स्टैंड जैसी मूलभूत सुविधाओं का प्रावधान किया गया था, लेकिन आज तक इनमें से कोई भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है।
शहर की मुख्य सडक़ों से लेकर बाजारों में पार्किंग न होने से रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। वाहन चालक कहीं भी वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे आवागमन बाधित होता है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति अब शहर के सभी ओवरब्रिजों पर है जहां दोनों तरफ वाहन खड़े किए जा रहे हैं, जिससे हादसों की आशंका बनी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते शहर को व्यवस्थित बनाने पर ध्यान देता, तो शहर की तस्वीर कुछ और होती।

सड़कों पर वाहन खड़े कर हो रही लोडिंग-अनलोडिंग
इसी तरह ट्रांसपोर्ट नगर का अभाव भी शहर के लिए बड़ी समस्या बना हुआ है। भारी वाहनों का शहर के अंदर प्रवेश लगातार जारी है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। साथ ही सड़कों पर वाहन खड़े करके लोडिंग-अनलोडिंग दिनभर की जा रही है। घंटों सडक़ पर वाहन खड़े रहते हैं। बड़े वाहनों को सुधारने के लिए गैरेज भी मुख्य मार्गों पर संचालित हो रहे हैं।

नहीं बन पा रहे ऑटो स्टैंड
शहर के मुख्य चौराहा, तिराहों पर ऑटो स्टैंड की सुविधा न होने से ऑटो चालक सडक़ों और चौराहों पर मनमाने तरीके से खड़े हो जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। तय स्थान न होने के कारण यात्रियों को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। सड़क पर ऑटो खड़े करने से रोड पर जाम की स्थिति भी बनती है। यदि स्थान निश्चित हो जाए, तो यह समस्या खत्म हो सकती है।

मुख्य मार्गों पर नहीं फुटपाथ
शहर के मुख्य मार्गों पर कहीं भी फुटपाथ नहीं है, जिससे पैदल चलने वाले लोगों को पेरशानी होती है और हादसों की आशंका बनी रहती है। लोग लंबे समय से फुटपाथ बनाने की मांग भी कर रहे हैं। सड़क के बाजू में चलने से की कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।