
The condition of the farming entrepreneur scheme increases the confuse
सागर. मध्यप्रदेश के किसानों और उनके बच्चों को उद्यमी बनाने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री कृषक उद्यमी योजना में एेसी शर्त रख दी, जिसके कारण योजना का लाभ ही नहीं मिल पाएगा। योजना के अनुसार लाभ लेने वाले को आयकर दाता नहीं होना चाहिए। जबकि, जब कोई १० लाख रुपए से अधिक का लोन लेने के लिए बैंकों में जाता है, तो पहली शर्त यह होती है कि आयकर दाता होना चाहिए। योजना में प्रावधान किया गया है कि १० लाख से २ करोड़ रुपए तक की लागत का कृषि आधारित उद्योग लगाया जा सकता है। एेसे में जब बैंक, कृषि और उद्योग विभाग की इन शर्तों के कारण योजना का लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। जल्दबाजी में योजना लागू करने से इसमें कई खामियां थी, जिन्हें मैदानी अमले के फीडबैक के बाद सुधारा गया। संशोधन के बाद इसे नए स्वरूप में फिर से लागू किया गया, लेकिन फिर भी बड़ी चूक रह गई।
आप आयकर देते हैं तो ही मिल सकेगा लोन
योजना योजना का लाभ लेने के लिए में किसान और उसके बेटे-बेटी के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता १०वीं रखी गई है। आय सीमा का कोई बंधन नहीं है। कृषि विभाग के अफसर भी योजना के प्रावधान में संशोधन के पक्ष में हैं, लेकिन उद्योग विभाग-कृषि के बीच सहमति नहीं बनने से विसंगति बनी है।
१२ विभाग योजना को लागू करेंगे
१६ नवंबर, २०१७ को योजना लागू की गई थी, लेकिन इसके कुछ प्रावधान किसानों के पक्ष में नहीं होने से मैदानी अमले से नकारात्मक फीडबैक मिला। इसके बाद इसमें संशोधन किया गया। आय सीमा, आयकर दाता और लोन की रकम के प्रावधान अब भी किसानों के पक्ष में नहीं है। योजना पर १२ विभाग के समन्वय से काम होगा।
&बैंकों को शासन की नीतियों का पालन करना होगा। लोन के समय कृषक आयकरदाता नहीं होना चाहिए। इसके बाद बैंक इनके पैन कार्ड बनवा सकते हैं। पहले भी योजनाओं में एेसा किया गया है कि बाद में आयकर रिटर्न भरवा दिया।
वीएल कांताराव, प्रमुख सचिव, सुक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग विभाग
Published on:
21 May 2018 09:48 am
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