18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

दो साल पहले खोदा गया था तीन मासूमों की मौत का गड्ढा

ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी नहीं रोका गया था खनन

2 min read
Google source verification
The pit where three innocent people died was dug two years ago.

The pit where three innocent people died was dug two years ago.

बीना. देहरी गांव में दो दिन पहले जिस गड्ढे में गिरकर तीन मासूमों की जान गई है, वह गड्ढा दो साल पहले खोदा गया था। बीना-कोटा दूसरी रेल लाइन बनाने के लिए मेहरोत्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने यहां गड्ढा खोदा था। स्कूल के पास खनन होने के कारण ग्रामीणों ने इसका विरोध भी किया था, लेकिन खनिज विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की सांठगांठ के चलते उत्खनन नहीं रोका गया था। इस मामले की यदि गंभीरता से जांच कराई जाए, तो मासूमों की मौत के जिम्मेदारों के चेहरा सामने आ जाएंगे।
दरअसल गुरुवार को देहरी गांव में हाइ स्कूल के पास निजी खेत में बने गड्ढे में डूबने से तीन आदिवासी बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना से पूरे गांव में मातम पसरा रहा। ग्रामीणों ने बताया कि बीना-कोटा के बीच दूसरी रेल लाइन बना रहे ठेकेदार को बड़ी मात्रा में मुरम की आवश्यकता थी और इसके लिए निजी खेत में उत्खनन किया था। पास में स्कूल होने के कारण ग्रामीणों ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन खनिज विभाग और प्र्रशासनिक अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उस समय अधिकारियों ने जांच कर खनन रुकवा दिया होता, तो यह घटना नहीं होती। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जांच में पाया गया था अवैध खनन
ग्रामीणों की शिकायत पर तत्कालीन तहसीलदार संजय जैन ने पटवारी को भेजकर उत्खनन की जांच कराई थी। हैरानी की बात तो यह है कि जांच में अवैध खनन पाया गया था और जांच प्रतिवेदन तत्कालीन एसडीएम को भेजा गया था, लेकिन खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
कराएंगे जांच
पहली प्राथमिकता मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाना है और तीनों के प्रतिवेदन तैयार कर भेज दिए गए हैं। जल्द ही परिजनों को चार-चार लाख रुपए की आर्थिक मदद मिल जाएगी। इसके बाद जांच कराएंगे कि खनन किस उद्देश्य किया गया था और किसने कराया था।
देवेन्द्र प्रतापसिंह, एसडीएम