
- अब लगातार आयोजित होंगी बैठकें, जमीन बंटवारे पर बनाई जाएगी सहमति
सागर. नगर निगम सागर और कैंट सागर के विलय को लेकर एक बार फिर से प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 महीनों से प्रक्रिया अधर में लटकी थी। रक्षा संपदा के निर्देश पर कैंट सागर प्रशासन ने अपना प्रस्ताव शासन को भेज दिया था जिसके तहत कैंट के आबादी वाले एरिया को ही निगम प्रशासन को दिया जा रहा है, जबकि निगम प्रशासन आबादी वाले क्षेत्र के साथ खुली जमीन की मांग भी कर रहा है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए शनिवार को नोडल अधिकारी सह निगमायुक्त राजकुमार खत्री की अध्यक्षता में स्मार्ट सिटी कार्यालय में बैठक आयोजित हुई जिसमें नामित सदस्य सागर छावनी परिषद प्रभुदयाल पटेल, मुख्य अधिशासी अधिकारी सागर छावनी परिषद मनीषा जाट, कर्नल सुरिन्द्र सिंह राणा, प्रवीण पाटीदार तहसीलदार सागर समेत अन्य शामिल रहे। शनिवार को आयोजित हुई बैठक में सबसे पहले कैंट की जमीन से अतिक्रमण हटाने पर चर्चा हुई।
निगम प्रशासन की ओर से करीब दो हजार एकड़ जमीन की मांग की गई है। शहर के जनप्रतिनिधियों ने मांग की थी कि आबादी वाले क्षेत्र के साथ खुली जमीन की भी जरुरत होगी ताकि उस जगह पर सामुदायिक भवन, आवासीय प्रोजेक्ट, खेल मैदान समेत अन्य योजनाओं का काम कराए जा सकें।
कैंट के एक बड़े भू-भाग पर अवैध अतिक्रमण है और अन्य गतिविधियां आयोजित हो रहीं हैं। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सबसे पहले कैंट की जमीन से अतिक्रमण हटाया जाए। संयुक्त टीम जल्द ही कैंट क्षेत्र का निरीक्षण कर अतिक्रमण को चिन्हित करेगी।
रक्षा मंत्रालय की ओर से ए-1 टाइप की भूमि को छोड़कर शेष जमीन नगर निगम में विलय करने का प्रस्ताव बनाया गया था लेकिन इस पर नगर निगम प्रशासन को आपत्ति है। निगम प्रशासन ए-1, ए-2, कृषि भूमि समेत कैंट क्षेत्र में मिलने वाले टैक्स को भी चाहता है ताकि निगम प्रशासन पर पडऩे वाले स्थापना व्यय के भार को कम किया जा सके।
- 1835 में हुई थी सागर छावनी की स्थापना
- 4048.792 एकड़ है छावनी का कुल क्षेत्रफल
- 3957.79 एकड़ भूमि सैन्य उपयोगी व संरक्षित है
- 142.22 एकड़ है सिविल एरिया
- 40000 से अधिक है छावनी की आबादी
- 7 वार्डों में विभाजित है छावनी परिषद
- 2469.012 एकड़ भूमि को निगम में विलय का प्रस्ताव भेजा
- 1957 एकड़ रक्षा संपदा भूमि को लेकर अटका है मामला
नगर निगम और कैंट के विलय को लेकर दोबारा प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार को फिर से बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें जमीन को लेकर सहमति बनाई जाएगी। - राजकुमार खत्री, निगमायुक्त सह कार्यकारी निदेशक एसएससीएल
Published on:
24 Nov 2024 07:11 pm
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