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सिकुड़ने लगी ट्रेन की पटरियां, रखवाली करने गले में जीपीएस लटकाकर 20 किमी चलना पड़ रहा पैदल

ट्रेन की पटरियां सिकुडऩे लगती है, ऐसा हर साल होता है, ऐसे में कहीं कोई हादसा न हो जाए, इस कारण ट्रैक मैन की ड्यूटी लगा दी जाती है, ताकि वह पैदल चलकर ट्रेन की पटरियों की रखवाली करता रहे.      

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सिकुड़ने लगी ट्रेन की पटरियां, रखवाली करने गले में जीपीएस लटकाकर 20 किमी चलना पड़ रहा पैदल

सिकुड़ने लगी ट्रेन की पटरियां, रखवाली करने गले में जीपीएस लटकाकर 20 किमी चलना पड़ रहा पैदल

सागर. ठंड का मौसम आते ही ट्रेन की पटरियां सिकुडऩे लगती है, ऐसा हर साल होता है, ऐसे में कहीं कोई हादसा न हो जाए, इस कारण ट्रैक मैन की ड्यूटी लगा दी जाती है, ताकि वह पैदल चलकर ट्रेन की पटरियों की रखवाली करता रहे, कहीं भी किसी प्रकार की टूट फूट या सिकुडऩे के कारण कोई समस्या नजर आती है, तो उसे दुरूस्त करना-करवाना और समय पर सूचना देना उसकी जिम्मेदारी होती है, ताकि ट्रेन निकलते समय किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आए।

कोटा भोपाल रेल मंडल में इस समस्या से बचने के लिए करीब 20 किलोमीटर ट्रैक पर टै्रक मैन की ड्यूटी पेट्रोलिंग के लिए लगाई गई है, ताकि कभी भी कोई ट्रेन आए तो दिक्कत नहीं आए। इन ट्रैक मैनों को कडक़ड़ाती ठंड में भी तैनात रहना पड़ता है, हैरानी की बात तो यह है कि इस दौरान इन्हें पीठ पर 20-22 किलो वजनी लोहे के सामान का झोला भी टांग कर घूमना पड़ता है, ताकि जहां समस्या नजर आए, उसे ठीक कर सकें।

सर्दी का मौसम अब रफ्तार पकड़ने लगा है। इस मौसम का असर रेलवे पटरियों पर सबसे ज्यादा पड़ता है। सर्दी की वजह से पटरियां सिकुड़ जाती हैं। समय पर मरम्मत न होने से बड़ा रेल हादसा हो सकता है। यही वजह है कि पमरे ने सभी ट्रैक मैन को पेट्रोलिंग करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। कड़कड़ाती ठंड में अब ट्रैक मैन को 20 किमी तक पैट्रोलिंग करना होगी।

रेलकर्मियों पर नजर रखने के लिए गले में जीपीएस भी लटकाना

हैरानी की बात यह है कि भोपाल और कोटा जैसे रेल मंडल में रेलवे ट्रैकमैन में 12 किलोमीटर की पेट्रोलिंग करते हैं, लेकिन जबलपुर मंडल के अधीन इन रेलकर्मियों से 20 किलोमीटर की पेट्रोलिंग प्रतिदिन कराई जा रही है। खास बात यह है कि 20 किलोमीटर दूरी की पेट्रोलिंग के अलावा सबसे बड़ी परेशानी बैग की होती है, जिसमें करीब 22 किलो लोहे का सामान रखा होता है। उसको पीठ में लादकर पेट्रोलिंग करने वाले रेलकर्मियों पर नजर रखने के लिए गले में जीपीएस भी लटकाना पड़ता है। इसकी मॉनिटरिंग सतत रूप से होती है, लेकिन सुरक्षा उपायों के नाम पर इन रेल कर्मियों को कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही है।

बंगले पर ड्यूटी निभा रहे 20 फीसदी ट्रैकमैन

सागर सेक्शन में 450 ट्रैकमैन पदस्थ, लेकिन इनमें से 20 प्रतिशत ट्रेकमैन ऐसे हैं, जिनसे बंगलों पर काम लिया जा रहा है। अधिकारियों के बंगले पर सफाई, बागवानी, कपड़े धोने जैसे काम कर रहे हैं। वहीं कुछ ट्रॉली मैन का काम कर रहे हैं। इस वजह से रेलवे ट्रैक की पड़ताल भी सही ढंग से नहीं हो पा रही है।

रेलवे के नियम एक ही है, लेकिन जबलपुर मंडल के अधिकारी अलग नियम चला रहे हैं। जीएमए डीआरएम को पत्र भेजकर इस समस्या से अवगत करा चुके हैं, यदि सुधार नहीं होता है तो यूनियन प्रदर्शन करेगा।

-महेंद्र कुर्मी, मंडल उपाध्यक्ष डब्ल्यूसीआरयु