
फाइल फोटो
बीना. खरीफ फसल की तैयारी में किसान जुट गए हैं और खाद, बीज की खरीदी शुरू कर दी है। सरकारी बीज कब आएगा इसकी कोई जानकारी न होने से किसान बाजार से महंगे दामों में अप्रमाणित बीज खरीद रहे हैं।
सरकारी बीज न आने के कारण किसान खरीफ फसल के लिए सोयाबीन और उड़द का बीज बाजार से खरीद रहे हैं। शहर में जगह-जगह सोयाबीन, उड़द प्रमाणित बीज के नाम पर महंगे दामों पर दे रहे हैं, लेकिन बीज का अंकुरण कैसा होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जाती है। बाजार में 7500 से 8000 रुपए क्विंटल तक बीज दिया जा रहा है। बीज बेचने वालों के पास कोई लायसेंस भी नहीं है। बीज विक्रेता अलग-अलग कंपनियों के बीज बाजार में बेच रहे हैं और उसे प्रमाणित बताया जा रहा है, लेकिन उसपर टैग नहीं है। यदि कहीं बोरियों पर टैग लगे भी हैं, तो सिर्फ एक टैग लगा है, जिससे बीज के सही होने की गारंटी नहीं रहती। प्रमाणित बीज पर दो टैग लगे होना जरूरी है।
उज्जैन, सीहोर के नाम पर बेच रहे पुराना बीज
जिन व्यापारियों के पास पुराना सोयाबीन रखा है वह उज्जैन, सीहोर सहित अन्य शहरों के नाम पर बेच रहे हैं। व्यापारी सिर्फ बोरियां प्रिंट कराकर मंगा रहे है और सोयाबीन यही भरा जा रहा है। बीज खराब निकलने पर किसानों को घाटा उठाना पड़ता है।
नहीं दिए जा रहे बिल
बीज विक्रेताओं द्वारा किसानों को पक्के बिल भी नहीं दिए जा रहे हैं। यदि बीज खराब निकलता है, तो किसान विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं कर पाएंगे। पिछले वर्षों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, फिर भी जिम्मेदारों द्वारा सख्ती नहीं बरती जाती है। शहर में ऐसे लोग भी बीज बेच रहे हैं, जिनके पास लायसेंस नहीं है।
नेताओं का संरक्षण
शहर के कुछ बीज विक्रेता धड्डले से सोयाबीन बेच रहे हैं और इन्हें नेताओं का संरक्षण होने के कारण अधिकारी भी कार्रवाई करने से डरते हैं। यदि अधिकारी कार्रवाई करने पहुंच भी जाएं, तो कार्रवाई न करने के लिए फोन भी तत्काल आने लगते हैं। नेताओं को किसानों की चिंता नहीं है।
पंजीयन किए, बीज कब आएगा पता नहीं
किसान एप से किसानों ने सरकारी बीज के लिए पंजीयन कराया है, लेकिन बीज कब आएगा इसकी कोई जानकारी नहीं है। सूत्रों की माने तो बीज आने की संभावना कम ही है।
की जाएगी जांच
बीज विक्रेताओं के यहां जांच की जाएगी और प्रमाणित बीज न मिलने पर कार्रवाई करेंगे। जिन बोरियों पर सिलाई के साथ दो टैग लगे होते हैं वही प्रमाणित बीज माना जाता है। साथ ही उसके साथ पक्का बिल भी दिया जाना चाहिए।
डीएस तोमर, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, बीना
Published on:
14 Jun 2024 12:31 pm
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