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38 हजार किसानों से 480 करोड़ रुपए के गेहूं की खरीद, भुगतान हुआ 320 करोड़

26 लाख क्विंटल के पार पहुंचा गेहूं खरीदी का आंकड़ा, चना, मसूर अब भी नहीं आ सकी पटरी पर, 1.30 लाख क्विंटल ही हो सकी खरीदी।  

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Wheat procurement at support price

Wheat procurement at support price

सागर. समर्थन मूल्य पर जिले में चल रही गेहूं खरीदी ने इस साल रेकार्ड कायम कर दिया है। अभी तक पंजीयन कराने वाले आधे किसानों से भी खरीदी नहीं हो सकी है, लेकिन खरीदी ने प्रशासनिक अधिकारियों के अनुमान को फेल कर दिया है। जानकारी के अनुसार सोमवार तक 38 हजार किसानों से 480 करोड़ 80 लाख रुपए के गेहूं की खरीदी हो चुकी है, लेकिन भुगतान 320 करोड़ 80 लाख रुपए का ही हुआ है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि किसानों को समय से भुगतान किया जा रहा है, केवल एेसे किसानों को ही परेशानी हो रही है जिनका बैंक खाता नंबर गलत फीड है। इसके लिए खाद्य विभाग ने स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाई है और सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक गलत खाता नंबर वाले पंजीयनों का सुधार किया जा रहा है।

94 में से अब तक 38 हजार ने हुई खरीदी

खाद्य विभाग के अनुसार जिले में गेहूं की उपज बेचने के लिए 94 हजार से ज्यादा किसानों ने अपने पंजीयन कराए थे, इसमें अब तक आधे किसान भी अपनी उपज नहीं बेच सके हैं। सोमवार तक की स्थिति देखें तो जिले के सभी 138 केंद्र/उपकेंद्रों पर 38200 किसानों से 2.62 लाख मीट्रिक टन यानी 26.20 लाख क्विंटल गेहूं की खरीदी हो सकी है। जिस हिसाब से हर रोज गेहूं की आवक हो रही है, इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि खरीदी का आंकड़ा 45 से 50 लाख क्विंटल तक पहुंच सकता है।

बेमौसम बारिश ने बढ़ाई मुसीबत

शासकीय खरीदी केंद्रों पर चना, मसूर की खरीदी भले ही अब तक खास न हो पाई हो, लेकिन गेहूं की बम्पर आवक हो रही है। हालात यह हैं कि बीते एक माह से हर रोज 80 हजार क्विंटल के आसपास खरीदी हो रही है। यही कारण है कि गेहूं खरीदी सोमवार को 26 लाख क्विंटल का आंकड़ा पार गया, लेकिन इस बम्पर आवक को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं है। इसके बाद बीते दो दिन से हो रही बेमौसम बारिश ने प्रशासनिक अधिकारियों की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ा दी हैं। यदि यही हाल रहा तो खुले आसमान तले रखा लाखों क्विंटल अनाज भीगकर खराब हो सकता है।

किसानों को भुगतान हो रहा है

जिले भर से जानकारियों जुटाई गई हैं, बारिश में कहीं भी नुकसान की स्थिति नहीं है। किसानों को समय से भुगतान हो रहा है, बैंक खाता नंबर गलत होने के कारण कुछ किसानों की राशि मिलने में देरी हुई है, लेकिन उसके लिए स्थानीय स्तर पर सुधरवाने की व्यवस्था की है।
राजेंद्र कुमार वाइकर, जिला आपूर्ति नियंत्रक