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सोयाबीन की फसल का रस चूस रही सफेद मक्खी, झड़ने लगी फलियां, किसानों को होगा भारी नुकसान

पहले बारिश से हो चुका है नुकसान और अब कीटों का प्रकोप, कीटनाशक दवाओं का भी नहीं हो रहा असर

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White fly sucking the juice of soybean crop, beans started falling

सूखकर जमीन पर गिर रहीं फलियां

बीना. खरीफ फसल इस वर्ष शुरुआत से ही प्राकृतिक आपदा और कीटों से प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों को घाटा उठाना पड़ेगा। अधिक बारिश के बाद फसलों में जो भी फलियां बची हैं वह सफेद मक्खी के प्रकोप से झडऩे लगी हैं, जिससे कुछ भी हाथ में नहीं आएगा।
क्षेत्र में किसानों ने 41 हजार 660 हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी की है और लाखों रुपए की लागत लगाई है, लेकिन फसलों की हालत देखकर आंसू निकल रहे हैं। फसल पर सफेद मक्खी का प्रकोप बढ़ गया है, जो फसल का रस चूस रही है और फसल के सूखने से फलियां झडऩे लगी हैं। किसान दवाओं का छिड़काव भी कर रहे हैं, लेकिन असर कुछ नहीं हो रहा है। किसान जयंत पाराशर ने बताया कि करीब पचास एकड़ में सोयाबीन की बोवनी की है और पहले लगातार बारिश के कारण फसल प्रभावित हुई, जिससे कम फलियां आई हैं। इसके बाद अब सफेद मक्खी फसल को नुकसान पहुंचा रही है। मक्खी के कारण फसल सूख रही है और फलियां गिरने लगी हैं। फसल को बचाने हजारों रुपए की दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन ज्यादा असर नहीं दिख रहा है।

रिंग कटर इल्ली का भी असर
सोयाबीन की फसल में रिंग कटर इल्ली (गर्डल बीटल) का भी असर है, जो पौधों की डाल या फिर बीच से काट देती है। इसपर भी दवाओं का असर नहीं हो पा रहा है, जिससे किसान परेशान हैं।

ज्यादा बारिश से बढ़े कीट
ज्यादा बारिश के कारण सफेद मक्खी का असर सोयाबीन फसल पर दिख रहा है, जो फसल का रस चूसती है और एक चिपचिपा पदार्थ छोड़ती है, जिससे पौधे की सभी क्रियाएं रुकने से सूखने लगता है। इससे फसल को बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड दवा का छिड़काव करें। एक हेक्टेयर में 500 लीटर पानी में एक लीटर दवा का घोल बनाकर डालें।
डीएस तोमर, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, बीना

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