सागर. तीखी बहस, पक्ष- विपक्ष के बीच तर्क- वितर्क और रह- रहकर अपनी बात को प्रभावी बनाने के लिए हो रहा शोर। यह पढ़कर आपके मस्तिष्क में संवैधानिक संस्था के किसी सत्र का दृश्य उभरा होगा। लेकिन यहां ऐसा नहीं है। यह नजारा है डॉ.हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में चल रही राष्ट्रीय महिला छात्र संसद का है। महिला छात्र संसद के दूसरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के बीच विभिन्न विषयों पर तीखी- नौंकझौंक ने सदन का दृश्य साकार कर दिया।
सभापति के निर्देश के साथ ही सदन की दूसरे दिन की कार्रवाई शुरू हुई। संघीय शक्ति संरचना में केंद्र की भूमिका पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने अपनी बात रखी। देश को नया स्वरूप देने और सशक्त बनाने के तथ्यों पर विपक्षी दल के सांसद ने नकार दिया। महिला सांसदों ने सत्ता दल पर सवाल खड़े करते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 व अन्य में अपने अनुकूल परिवर्तन करने के आरोप लगाए। नौंकझौंक के बीच सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी आरोपों को काटते हुए इन परिवर्तनों को जनमानस के लिए हितकारी बताया।
सदन के चौथे सत्र में भी लाए गए बिल के समर्थन और विरोध में आमने- सामने रहे। सत्ता पक्ष ने सदन में जी-20 में भारत के नेतृत्व का बिल प्रस्तुत किया। चर्चा में सत्ता पक्ष के सांसदों ने इसे वसुधैव कुटुम्बकम के ध्येय वाक्य पर आधारित और देश को अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि दिलाने वाला बताया। उन्होंने कहा इसके माध्यम से हमारे मूल्यों एवं संस्कृति को दूसरे देशों से साझा करने से देश का गौरव बढ़ेगा। यही नहीं उनकी समस्याओं के निराकरण पर भी काम करने का अवसर मिलेगा। विपक्ष ने इस बिल के समर्थन में किए गए दावों को गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने वाला करार दिया।
विपक्षी सांसदों ने कहा जिस देश में एक लाख छात्रों पर एक शिक्षक है वहा कैसे इस तरह के सम्मेलनों की अध्यक्षता कर विश्वगुरु बनने का सपना देखा जा सकता है। सत्ता पक्ष महिलाओं, बेरोजगारों की समस्याओं सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे सम्मेलन केवल प्रचार पाने का एक अवसर है।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के सांसदों ने प्रतिवाद किया। पक्ष- विपक्ष के बीच होती तीखी बहस के बीच बहुमत से बिल पारित किए गए। राष्ट्रीय महिला छात्र संसद के इन सत्रों में सदन की कार्रवाई का प्रतिरूप देखने दीर्घा में भी विश्वविद्यालयीन छात्र- छात्राएं मौजूद रहे। महिला छात्र संसद का समापन गुरुवार को अंतिम सत्र के साथ होगा। सदन में 8 राज्यों के विश्वविद्यालयों से आई छात्राओं ने जनप्रतिनिधि के रूप में सदन में अपनी भूमिका के निर्वाह का शानदार प्रस्तुतिकरण किया।