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world aids day 2017 : बच्चों से लेकर बड़े तक खतरनाक बीमारी की चपेट में

हर दूसरे दिन सामने आ रहा एक एचआईवी पॉजिटिव

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सागर

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Reshu Jain

Dec 01, 2017

world aids day 2017

world aids day 2017

सागर. शहर में एचआईवी पीडि़तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जागरुकता की कमी के कारण महिला-पुरुषों के अलावा गर्भ में पल रहे बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बीते सात साल में संभाग में 1235 मरीजों को एचआईवी पॉजिटिव निकला है, अकेले सागर में ही 800 मरीज हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो औसतन हर दूसरे दिन एक मरीज एचआईवी की चपेट में आ रहा है। एआरटी सेंटर में 70 बच्चे दर्ज हैं, जिन्हें एचआईवी पॉजिटिव निकला है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी मासूम अपने एचआईवी पीडि़त माता-पिता की वजह से इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आए हैं। पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है। 2011 में मरीजों की संख्या १५६ थी, जो सात साल बाद 242 पर पहुंच गई है। आंकड़ों के मुताबिक हर साल 20-25 मरीज बढ़ रहे हैं।

04 बच्चों की अब तक हुई मौत
186 महिला पुरुष ने भी गंवाई जान

संभाग में सबसे ज्यादा युवा वर्ग
असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से एचआईवी की चपेट में सबसे ज्यादा युवा आ रहे हैं। गर्भवतियों में भी इसका खतरा ज्यादा है। अभी एआरटी सेंटर में संभाग की ऐसी २६ गर्भवती महिलाएं दर्ज हैं, जो एचआईवी पॉजिटिव हैं।

ऐसे बढ़ रहा ग्राफ
वर्ष - मरीज
2017 - 242
2016 - 210
2015 - 191
2014 - 172
2013 - 139
2012-2011 - 156

स्तनपान से भी फैल सकता है एचआईवी
एचआईवी स्तनपान से भी फैल सकता है, इसलिए संक्रमित महिलाओं को सुझाव दिया जाता है कि वे अपने बच्चों को स्तनपान न कराएं। साथ ही संक्रमित महिलाओं से पैदा होने वाले बच्चों को जन्म के बाद 6 से 12 घंटे के अंदर जिडोवुडिन (ब्रांड का नाम र्रिटोवीर) नामक एचआईवी दवा दी जाती है। बच्चे के जन्म के समय मां से उसमें एचआईवी वायरस प्रसारित होने की स्थिति में यह दवा फिर से बच्चे की सुरक्षा करती है।

बच्चों को बचाने जांच बेहद जरूरी
काउंसलर अनुपम बोहरे ने बताया कि बच्चों को एड्स से बचाने के लिए प्रत्येक गर्भवती महिला को एचआईवी की जांच करानी चाहिए, ताकि खुशियों भरे इन पलों में संक्र मण फैलने से रोका जा सके। यदि पहले ही महिला की जांच हो जाए तो बच्चों को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।