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लेखक प्रेमचंद के साहित्य ने किया समाज का पथ प्रदर्शन

प्रगतिशील लेखक संघ की संगोष्ठी

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Writer Premchand's literature performed the path of society

Writer Premchand's literature performed the path of society

प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर किया गया नमन
सागर. प्रगतिशील लेखक संघ की गोष्ठी नमक मंडी में आयोजित की गई। मुंशी प्रेमचंद की जयंती की पूर्व संध्या पर प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के महासचिव पीआर मलैया ने कहा कि प्रेमचंद ने जीवन के पथ का निर्देशन किया है। उन्होंने राजनीतिक व समाज सुधार के लक्ष्य को पूरा किया है। स्वराज्य किसी से सत्ता छीनना नहीं वरन वह है जिसमें सबको न्याय व अभय मिले। कैलाश तिवारी विकल ने लेख प्रेमचंद कल और आज में कहा कि प्रेमचंद ने दलित वंचित को अपने साहित्य में स्थान दिया। डॉ एमके खरे ने प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन के अंश का वाचन करते हुए कहा कि साहित्य में प्रभावपन स्थापित करने के लिए जरूरी है कि वह वास्तविकता से परिचित हो। साहित्य नायक नायिका तक सीमित और मनोरंजन ही नहीं है। डॉ नलिन जैन ने गोपाल दास नीरज को समर्पित लेख पढ़ा। साथ ही साहित्यकार व शिक्षाविद् आरडी मिश्र को श्रद्धांजलि दी गई। काव्य जगत के नए हस्ताक्षर स्वतंत्र जयहिंद ने कहा कि अजब माहौल है आजकल दिन मे भी सड़कों पर, यहां बेखौफ हो बेटी सयानी चल नहीं सकती।

निर्मल चंद निर्मल ने मां और उन्मुक्त रोना पर पाठ किया।
डॉ अनिल जैन रास्ता खुद मिल पाएगा, बन के नदी की धार बहो। क्रांति जबलपुरी ने कहा - तुम गजब हौसला दिखाते हो, अंधेरों में भी जगमगाते हो। देवी सिंह ठाकुर ने कहा गुड़ न देओ गुरीली बातें देके डाले डारो, जित्तो लंबो होए पिछोरा उत्तई पांव पसारो।
आशीष सिंघई निशंक ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि - देख लेना रंज खशियां गीत में भर जाऊंगा, एक दिन में गीत में ही डूब के मर जाऊंगा। उपन्यासकार महेन्द्र फुसकेले ने मालती उपन्यास के अंश का पाठ किया। केएल तिवारी अलबेला, निरंजना जैन, वृंदावन राय सरल, जीसी नगरिया, मुकेश तिवारी, चंद्र कुमार जैन, आनंद मिश्र अकेला, डा दिनेश साहू, नम्रता फुसकेले आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। आभार प्रलेस के अध्यक्ष टीआर त्रिपाठी रूद्र ने माना।