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रिहाई की संस्तुति वाली फाईल का इंतजार करते-करते ताेड़ दिया जेल में दम

सहारनपुर जेल में 78 वर्षीय एक बुजुर्ग की माैत हाे गई। पिछले दिनाें इस शख्स की रिहाई की संस्तुति हाे गई थी लेकिन फाईल में शासन में अटक गई थी।
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सहारनपुर

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shivmani tyagi

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Updated: 20 Apr 2018, 10:46 PM IST

jail

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सहारनपुर।

उमरे दराज मांग के लाए थे चार दिन

दाे आरजू में कट गए आैर दाे इंतजार में

मशहूर शायर की ये दाे पंक्तियां अब देवबंद के रहने वाले जमशैद के परिवार काे रह-हकर तड़पाती रहेंगी। कारण भी है, दरअसल जमशैद ने रिहाई के इंतजार में जेल में ही दम ताेड़ दिया। 78 साल के जमशैद की पिछले वर्ष मेडिकल बाेर्ड ने रिहाई की संस्तुति कर दी थी। जमशैद की फाईल भी शासन काे चली गई थी लेकिन अभी तक शासन से जमशैद की इस फाईल पर रिहाई के आदेश नहीं हुई थी। जमशैद जेल की सलाखाें के पीछे यही इंतजार कर रहा था कि कब उसकी फाईल पर रिहाई के आदेश हाें आैर वह दाे दिन ही सही, खुली हवा में सांस लेकर सके लेकिन एेसा नहीं हुआ, इससे पहले कि जमशेद की रिहाई वाली फाईल पर हस्ताक्षर हाेते उसकी माैत हाे गई।

अस्पताल में ताेड़ा दम

78 वर्षीय जमशैद देवबंद के पठानपुरा का रहने वाला था। वर्ष 1989 में देवबंद के पठानपुरा में हुए एक मर्डर के मामले में जमशैद समेत करीब 12 आराेपी नाजमद थे। इनमें से अधिकांश काे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसी आदेश में जमशैद काे भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। पिछले वर्ष दिसंबर माह में मेडिकल बाेर्ड ने उम्र आैर बीमार काे देखते हुए जमशैद काे रिहा करने की संस्तुति राज्य सराकर से की थी। संस्तुति की यह फाईल भी राज्य सराकर काे प्रेषित कर दी गई थी। अभी तक राज्य सराकर की आेर से इस फाईल का संज्ञान नहीं लिया गया था। या कह लीजिए कि अभी तक राज्य सरकार की आेर से इस फाईल पर रिहाई के आदेश नहीं किए थे। बताया यह भी जाता है कि इस हत्याकांड के कुल आराेपियाें में से सात की माैत हाे चुकी है। पिछले वर्ष इसी मामले के एक बंदी की भी जेल में ही माैत हाे गई थी। अब शुक्रवार काे जमशैद ने भी दम ताेड़ दिया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डा. वीरेश राज शर्मा के मुताबिक हालत बिगड़ने पर जमशैद काे पहले जेल के डॉक्टर दिखाया गया जिन्हाेंने जमशैद काे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में उपचार के दाैरान जमशैद ने दम ताेड़ दिया।

ये भी जानिए

दरअसल जेलाें में बंद सभी बंदी न्यायालय के अधीन हाेते हैं जबकि सभी कैदी राज्य सरकार के आधीन हाेते हैं। एेसे में राज्य सरकार चाहे ताे उम्र के अंतिम पड़ाव में कैदी के जेल के दाैरान रहे व्यवहार आैर उसकी बीमारी की हालत काे देखते हुए रिहाई कर सकती है। इसी के तहत मेडिकल बाेर्ड ने जमशैद की रिहाई के लिए संस्तुति की थी।