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बाबा गुरिन्दर सिंह ढिल्लो ने बताया 84 योनियों से बंधन मुक्ति का मंत्र

सहारनपुर के पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग व्यास के मेजर सेंटर में चल रहे दो दिवसीय समागम में बाबा गुरिंदर सिंह ने कहा कि दुनियावी रिश्ते सिर्फ गर्ज और मतलब के हैं, असली रिश्ता आत्मा का परमात्मा से है।

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पिलखनी स्थित मेजर सेंटर में सत्संग के लिए पहुंचे अनुयायी

पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास के दो दिवसीय समागम में पहुंचे बाबा गुरिंदर सिंह ने अनुयायियों को दर्शन देकर निहाल किया। इस दौरान उन्होंने प्रश्नोत्तरी के दौरान अनुयायियों को बताया कि मनुष्य जीवन 84 योनियों के बंधन से मुक्त होने के लिए मिला है। बोले कि इस जन्म में हम जो भी दुख सहन करने पड़ रहे हैं वो हमारे पूर्व जन्मों के कर्म हैं। हमें 84 योनियों के बंधन से मुक्त होने के लिए ही मानव जीवन मिला है। हमें परमात्मा की भक्ति करनी चाहिए और यही एकमात्र रास्ता है जो हमें 84 योनियों के बंधन से मुक्त कर सकता है। गुरु और परमात्मा की महत्वता बताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग शरीर को गुरु मान लेते हैं लेकिन असली गुरु शब्द होता है जो अंत समय तक हमारे साथ रहता है।


पिलखनी स्थित मेजर सेंटर पर राधा स्वामी सत्संग ब्यास का यह पहला दिन था। गुरुवार आज दूसरे दिन बाबा गुरिंदर सिंह सत्संग करेंगे। शुक्रवार के सत्संग में करीब छह लाख अनुयायियों के पहुंचने की उम्मीद है।उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी आज सत्संग में पहुंच रहे हैं। इसके लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी रातभर की है। उपमुख्यमंत्री यहां पार्टी कार्यकर्ताओं से भी बात करेंगे। इतना ही नहीं बजट पर प्रबुद्धजनों से वार्ता करेंगे।


सत्संग में पहले दिन 20 हजार से अधिक वाहन पहुंचे। इन वाहनों के लिए 15 अलग-अलग पार्किंग बनाई गई। अनुयायियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े इसके लिए पूरे शहर में स्वयंसेवी लगे हैं। ये सभी ट्रैफिक का संचालन करा रहे हैं। सत्संग के पहले दिन करीब पांच लाख की संख्या में अनुयायी पहुंचे और बाबा गुरिंदर सिंह की अमृतवाणी को सुना। इस दौरान बाबा गुरिंदर सिंह बैटरी से चलने वाली एक खुली कार में बैठकर आए और श्रद्धालुओं को दर्शन देकर निहाल किया।

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आपको जानकर हैरानी होगी कि करीब दो घंटे तक पहले दिन सत्संग चला और बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने अनुयायियों को दर्शन दिए लेकिन इस दौरान कोई भी शोर नहीं हुआ। सभी अनुयायी शांत रहें और एक जयकारा तक ही नहीं लगाया गया।